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बेतवा में राख बहाने पर एनजीटी का नोटिस, भानू सहाय बोले- संघर्ष जारी रहेगा

संवाद न्यूज एजेंसी झांसी। बेतवा नदी में पारीछा थर्मल पावर प्लांट से फ्लाई एश (राख) बहाए जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली के रुख का बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने स्वागत किया है। मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय ने कहा कि बेतवा को अविरल और निर्मल बनाने तक संघर्ष जारी रहेगा। भानू सहाय ने कहा कि बेतवा केवल बुंदेलखंड की जलधारा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारीछा थर्मल पावर प्लांट से वर्षों से राख नदी में बहाए जाने के कारण बेतवा के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। नदी में बने राख के बड़े-बड़े टापू इसकी गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि फ्लाई एश में मौजूद आर्सेनिक, सीसा और पारा जैसे तत्वों को लेकर भी गंभीर पर्यावरणीय चिंता है। इससे नदी के पानी और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर नरेन्द्र कुशवाहा समेत अन्य साथियों के साथ एनजीटी में ओए नंबर 528/2026 के तहत याचिका दायर की गई है। भानू सहाय के मुताबिक, पर्यावरण कार्यकर्ता नरेन्द्र कुशवाहा ने एनजीटी के समक्ष मामले से जुड़े तकनीकी तथ्य, तस्वीरें और जिलाधिकारी झांसी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इन तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा, "यह हमारी कानूनी लड़ाई की पहली महत्वपूर्ण शुरुआत है। लड़ाई सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रहेगी। जब तक बेतवा में राख डालना पूरी तरह बंद नहीं होता, नदी में बने राख के टापुओं की सफाई नहीं होती और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय नहीं की जाती, तब तक बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा सड़क से अदालत तक संघर्ष करता रहेगा।"

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