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सार्वजनिक गणेशोत्सव ने समाज के सभी वर्गों को किया एकजुट
नीरज नरवरिया
Updated Wed, 16 Sep 2026 09:57 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सहायक आचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार साहू ने कहा कि गणेश महोत्सव लोकतंत्र और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा ने समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने का काम किया है। यह उत्सव सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने के साथ ही सामाजिक समरसता का संदेश भी देता है। वर्तमान समय में सामाजिक एकता और समरसता बनाए रखने में गणेशोत्सव की भूमिका महत्वपूर्ण है।
वह नेहरू महाविद्यालय में ‘भारत की सामाजिक समरसता, एकता एवं सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक श्रीगणेश महोत्सव’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि गणेश महोत्सव भारतीय संस्कृति की ऐसी परंपरा है, जो सदियों से समाज को जोड़ती आ रही है। भगवान श्रीगणेश विघ्नहर्ता होने के साथ ही एकता और लोकमंगल के प्रतीक हैं। यह उत्सव जाति, धर्म और भाषा की दीवारों से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य गणेश महोत्सव को केवल धार्मिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक एकता, समरसता और सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक के रूप में समझना था।
प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी पर्वों और महोत्सवों के गहरे सांस्कृतिक महत्व को समझने से दूर होती जा रही है। गणेश महोत्सव भारतीय संस्कृति की सामासिक एकता का प्रतीक है। यह धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव को भी मजबूत करता है।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष शरद खैरा ने कहा कि संगोष्ठियों के माध्यम से युवा पीढ़ी और छात्र-छात्राओं तक सकारात्मक एवं रचनात्मक संदेश पहुंचाना विद्वानों और शिक्षाविदों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संगोष्ठी में हिंदी के सहायक आचार्य हिमांशु धर द्विवेदी ने गणेश महोत्सव में युवाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक चेतना बढ़ाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। इतिहास के सहायक आचार्य डॉ. रामकुमार रिछारिया ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में गणेश उत्सव के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। हिंदी के सहायक आचार्य डॉ. सुधाकर उपाध्याय ने कहा कि गणेश महोत्सव भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रमाण है।
संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दीपक पाठक ने कहा कि श्रीगणेश महोत्सव की परंपरा भारत में प्राचीन काल से चली आ रही है। सनातन परंपरा में श्रीगणेश महोत्सव अहंकार से रहित होकर श्रेष्ठ व्यक्तित्व और गुणों को स्वीकार करने का संदेश देता है।
इस मौके पर महाविद्यालय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य रघुवीर तिवारी, प्रो. आशा साहू, प्रो. अनिल सूर्यवंशी, जितेंद्र कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. सूबेदार यादव, डॉ. राजेश तिवारी, डॉ. ओपी चौधरी, डॉ. रिचा राज सक्सेना, कविता पैजवार सहित कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक पाठक ने किया।
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