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पेट्रोल में 31% इथेनॉल पर बवाल, कर्नाटक के दावों को केंद्र ने किया खारिज, कहा- 893 सैंपल टेस्ट में पास

Sun, 08 Nov 2026 06:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर नया विवाद सामने आया है। कर्नाटक सरकार की ओर से कुछ पेट्रोल पंपों पर निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिले होने का दावा किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए पेट्रोल के कुल 893 नमूनों की जांच की गई है। इन सभी नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई है। सरकार के मुताबिक, जांच में कहीं भी तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) ने इन नमूनों का परीक्षण किया। जांच में सभी 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानक IS 17021 के तहत तय 19 से 21 प्रतिशत की सीमा के भीतर पाई गई। मंत्रालय का कहना है कि यह परीक्षण देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन की पुष्टि करता है।

मंत्रालय ने विशेष रूप से कर्नाटक से लिए गए पेट्रोल के 56 नमूनों का भी विवरण दिया। इन नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई और इसका औसत 19.30 प्रतिशत रहा। ये नमूने राज्य के अलग-अलग स्थानों और तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों के पेट्रोल पंपों से लिए गए थे। केंद्र सरकार के इन आंकड़ों के बाद कर्नाटक सरकार की ओर से लगाए गए अधिक एथेनॉल मिलाने के आरोपों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दरअसल, कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान विभाग ने हाल ही में एक बयान जारी कर दावा किया था कि राज्य के कुछ खुदरा पेट्रोल बिक्री केंद्रों से एकत्र किए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 26 से 31 प्रतिशत तक पाई गई है। इस दावे के सामने आने के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता, वाहनों के इंजन और ईंधन मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। यदि पेट्रोल में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मौजूद होने की पुष्टि होती है, तो यह ईंधन की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।

वहीं, सरकारी तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। तीनों तेल विपणन कंपनियों ने अक्टूबर 2026 में की गई नमूना संग्रह और परीक्षण प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। कंपनियों का तर्क है कि नमूने किस तरीके से लिए गए, परीक्षण के दौरान किन तकनीकी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया और क्या सभी वैधानिक नियमों का पालन हुआ, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। कंपनियों के अनुसार, इन विवरणों के बिना कर्नाटक सरकार के जांच परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं है।

फिलहाल इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार के दावों के बीच अंतर बना हुआ है। एक तरफ केंद्र सरकार 893 नमूनों की जांच का हवाला देकर पेट्रोल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक सरकार के कुछ नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत एथेनॉल मिलने के दावे ने सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए दोनों पक्षों की नमूना संग्रह और परीक्षण प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। आम वाहन चालकों की नजर अब इस बात पर है कि पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठे इन सवालों का अंतिम और प्रमाणिक जवाब कब सामने आता है।

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