नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए विनाशकारी मलबे के बहाव के 12वें दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है। बचावकर्मी अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जबकि प्रशासन के सामने बरामद शवों की पहचान करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। नेपाल पुलिस के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,341 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दलों ने अब तक 13,100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ रहा है, मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर तस्वीर स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
इस विनाशकारी घटना की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से हुई थी। इसके बाद भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का बेहद तेज बहाव आया, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। अचानक आए इस मलबे और पानी के सैलाब ने बड़ी संख्या में घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया या बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कई जगहों पर जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं।
इस त्रासदी का असर नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, चीन की ओर भी कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सीमा से लगे क्षेत्रों में भी मलबे और बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में कम से कम 85 बच्चे शामिल हैं, जिससे इस आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान को लेकर सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 500 शव ऐसे बरामद हुए हैं जिनके शरीर के कुछ हिस्से नहीं हैं। कई शव लंबे समय तक पानी और मलबे में रहने के कारण खराब स्थिति में हैं, जिसके चलते उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा है। अधिकारी और बचाव दल लापता लोगों की जानकारी जुटाने, बरामद शवों की पहचान करने और परिजनों तक सूचना पहुंचाने में लगे हुए हैं। इस बीच, राहत अभियान के साथ-साथ प्रभावित लोगों को जरूरी सहायता पहुंचाने का काम भी जारी है। हजारों लोगों के अब भी लापता होने के कारण आने वाले दिनों में बचाव और खोज अभियान बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।