नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायती राज व्यवस्था, विकास योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी देने के लिए ऊना जिले में क्षमता निर्माण एवं बुनियादी प्रशिक्षण कार्यशाला का पहला चरण शुरू हो गया है। मंगलवार को जिला परिषद हॉल ऊना में आयोजित कार्यशाला में उपायुक्त जतिन लाल ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल भी इस अवसर पर मौजूद रहे। कार्यशाला में विकास खंड अंब की 19 ग्राम पंचायतों के कुल 143 नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें 19 प्रधान, 19 उपप्रधान और 105 वार्ड सदस्य शामिल रहे। जिले के सभी विकास खंडों की ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला हैं। ग्रामीण विकास के साथ देश और प्रदेश के निर्माण में पंचायतों की अहम भूमिका है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए स्पष्ट विकास कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए और योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में धरातल पर उतारा जाए। पंचायतों में स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने की संभावनाओं को भी तलाशने और विकसित करने की जरूरत है, ताकि पंचायतें आर्थिक रूप से मजबूत होकर विकास कार्यों को और गति दे सकें। जतिन लाल ने कहा कि ग्राम सभाएं पंचायती राज व्यवस्था का महत्वपूर्ण मंच हैं। इनमें अधिक से अधिक पंचायतवासियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। विशेष रूप से युवाओं को ग्राम सभाओं और विकास प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार, ऊर्जा और विजन का इस्तेमाल गांवों के विकास के लिए किया जाए। इससे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। उपायुक्त ने पंचायत प्रतिनिधियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रतिनिधियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। कार्यशाला में पंचायती राज व्यवस्था, विकास योजनाओं, वित्तीय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पंचायतों के सतत विकास से संबंधित जानकारी दी जा रही है। अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को अपने कार्यकाल के दौरान छोटे-बड़े विकास कार्यों के लिए स्पष्ट और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। प्रत्येक कार्य की प्राथमिकता तय कर उसे निर्धारित अवधि में पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने पंचायतों को मिलने वाले अनुदान और सरकारी धनराशि का नियमों एवं निर्धारित मानकों के अनुसार सदुपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों को पंचायती राज विभाग की प्रक्रियाओं और नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि विकास कार्य पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पूरे किए जा सकें। जिला पंचायत अधिकारी श्रवण कुमार ने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के सतत विकास और स्थानीयकरण के लिए नौ प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनका उद्देश्य वर्ष 2030 तक गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध, स्वस्थ और सशक्त बनाना है। इनमें गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका वाला गांव, स्वस्थ गांव, बाल हितैषी गांव, जल पर्याप्त गांव, स्वच्छ एवं हरित गांव, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाला गांव, सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, सुशासन वाला गांव और महिला हितैषी गांव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। पंचायत स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा दे सकता है। सितंबर से जनवरी तक चलेगा प्रशिक्षण जिला पंचायत अधिकारी ने बताया कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सितंबर 2026 से जनवरी 2027 तक बैचवार प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण जिला परिषद हॉल ऊना में आयोजित होगा। प्रशिक्षण में शामिल होने वाले प्रत्येक प्रतिभागी के लिए आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल फोन साथ लाना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत अधिकारी श्रवण कुमार, बीडीओ ओमपाल डोगरा सहित संबंधित ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।