भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव मलकीत सिंह ने प्रदेश सरकार की आबकारी नीति और स्थानीय विधायक की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नशा मुक्ति को लेकर मंचों से बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। मलकीत सिंह ने कहा कि वह सरकार की ओर से चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों में विरोधाभास नजर आ रहा है। उनके अनुसार, एक तरफ नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जगह-जगह शराब के नए ठेके खोलने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। गांवों और मुख्य मोड़ों पर ठेकों का आरोप भाजपा नेता ने दावा किया कि नई आबकारी नीति के बाद लगभग हर गांव और मुख्य मोड़ पर शराब की दुकानें खुल गई हैं। उन्होंने कहा कि शराब की आसान उपलब्धता और बढ़ती पहुंच के कारण इसका सेवन धीरे-धीरे लोगों की आदत बनता जा रहा है। इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल भाषण और औपचारिक अभियान पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को अपनी नीतियों और फैसलों में भी नशा मुक्ति की प्रतिबद्धता दिखाई देनी चाहिए। स्थानीय विधायक पर भी साधा निशाना मलकीत सिंह ने स्थानीय विधायक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधायक को केवल मंचों से भाषण देने के बजाय क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए जमीन पर उतरकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं में नशे के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ठोस योजना तैयार करनी होगी। इसके लिए जागरूकता अभियान के साथ-साथ रोजगार, शिक्षा और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है। रोजगार और खेल सुविधाओं की मांग भाजपा नेता ने कहा कि आज के युवाओं को शराब के ठेकों की नहीं, बल्कि रोजगार के अवसरों और खेल के मैदानों की जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में खेल सुविधाएं विकसित की जाएं और रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं। मलकीत सिंह ने चेतावनी दी कि सरकार की कथित दोहरी नीति अब जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि शराब की दुकानों की बढ़ती संख्या और नशे के प्रभाव को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनता सरकार के फैसलों का विरोध करेगी।