परवाणू-शिमला फोरलेन पर चक्कीमोड़ में पहाड़ खिसकने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नए सिरे से सुरक्षा डिजाइन तैयार किया जा रहा है। ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद इंजीनियर अब इस बात पर काम कर रहे हैं कि पहाड़ को हाईवे से करीब 126 मीटर पीछे से ही सुरक्षित किया जा सके। चक्कीमोड़ में पहाड़ की स्थिति और खिसकने वाले क्षेत्र का पता लगाने के लिए ड्रोन सर्वे करवाया गया था। सर्वे में सामने आया कि पहाड़ हाईवे से लगभग 126 मीटर पीछे से खिसक रहा है। इसके बाद सुरक्षा कार्यों की पुरानी योजना में बदलाव करते हुए नए सिरे से ड्राइंग तैयार करने का निर्णय लिया गया है। इंजीनियर अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पहाड़ को सुरक्षित करने के लिए तकनीकी डिजाइन तैयार कर रहे हैं। इसमें यह तय किया जाएगा कि किस स्थान से और किस तकनीक के माध्यम से पहाड़ को स्थिर किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि नई ड्राइंग तैयार होने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। डिजाइन तैयार होने के बाद उसी के आधार पर पहाड़ को सुरक्षित करने का कार्य शुरू किया जाएगा। फिलहाल चक्कीमोड़ में यातायात सुचारू रूप से चल रहा है। हालांकि, करीब 50 मीटर के क्षेत्र में पहाड़ से पानी आने के कारण मलबा सड़क पर पहुंच रहा है। इसे देखते हुए मौके पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। एसआरएम कंपनी की ओर से कर्मचारियों को 24 घंटे की शिफ्टों में तैनात किया गया है। कंपनी की टीम चक्कीमोड़ की स्थिति पर नजर रख रही है, ताकि सड़क पर मलबा आने या पहाड़ की स्थिति में बदलाव होने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। बरसात के बाद ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर डिजाइन टीम पहाड़ को सुरक्षित करने के कार्य को आगे बढ़ाएगी। अधिकारियों और इंजीनियरों का ध्यान फिलहाल पहाड़ की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उसके अनुरूप सुरक्षा उपाय तय करने पर है। एसआरएम कंपनी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि चक्कीमोड़ में ड्रोन सर्वे शुरू कर दिया गया है। ड्रोन के माध्यम से चक्कीमोड़ के दोनों पहाड़ों का सर्वे किया गया। इसमें पता चला है कि पहाड़ हाईवे से करीब 126 मीटर पीछे से खिसक रहा है। उन्होंने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब नई ड्राइंग तैयार की जा रही है। इसी डिजाइन के अनुसार पहाड़ को उसी स्थान से सुरक्षित करने की योजना बनाई जाएगी। उनका कहना है कि डिजाइन तैयार होने के बाद सुरक्षा कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।