सिरमौर रियासत के गौरवशाली इतिहास का गवाह नाहन का रानीताल पार्क आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी शहर के बच्चों के लिए मनोरंजन और खेलकूद का प्रमुख ठिकाना रहा यह ऐतिहासिक पार्क अब टूटे झूलों, खराब नावों और जंग खा रही टॉय ट्रेन के बीच अपनी बदहाल तस्वीर पेश कर रहा है। पार्क की मौजूदा स्थिति देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिस जगह पर बच्चों की हंसी और खेलकूद की आवाजें गूंजनी चाहिए थीं, वहां मनोरंजन के साधन ही कबाड़ में क्यों तब्दील हो गए हैं। रानीताल पार्क नाहन शहर के बीचोंबीच बच्चों के लिए मनोरंजन का प्रमुख स्थान रहा है। शहर में बढ़ते कंक्रीट निर्माण के बीच खुले मैदान और सुरक्षित खेल स्थल सीमित होते जा रहे हैं। ऐसे में इस पार्क की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन पार्क में लगे बच्चों के कई झूले टूट चुके हैं। छुट्टी के दिन जब अभिभावक बच्चों को लेकर यहां पहुंचते हैं तो उन्हें मनोरंजन के बजाय टूटे और अनुपयोगी झूले नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए शहर में पहले ही मनोरंजन और खेलकूद के सुरक्षित विकल्प बेहद सीमित हैं। ऐसे में रानीताल पार्क की बदहाल स्थिति सीधे तौर पर बच्चों की सुविधाओं को प्रभावित कर रही है। पार्क को सुंदर और व्यवस्थित रखने के लिए क्यारियों के आसपास लोहे की जालियां लगाई गई थीं। अब इनमें से कई जालियां टूट चुकी हैं या गायब हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जालियों की गुणवत्ता ऐसी थी कि वे लंबे समय तक टिक नहीं सकीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पार्क में लगाए गए सामान की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई और खराब काम के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई। रानीताल पार्क में बच्चों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र टॉय ट्रेन और तालाब में चलने वाली नावें रही हैं। लेकिन अब ये मनोरंजन के साधन खुद पार्क की बदहाली की तस्वीर बन गए हैं। ट्रेन लंबे समय से ट्रैक पर खड़ी है और इस्तेमाल के बजाय जंग खा रही है। वहीं तालाब में मौजूद नावों की हालत भी खराब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता के पैसे से खरीदे गए इन संसाधनों का इस्तेमाल नहीं होना सरकारी धन के उपयोग और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि पार्क के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के नाम पर समय-समय पर खर्च किए गए बजट का वास्तविक लाभ बच्चों और शहरवासियों को क्यों नहीं मिल पा रहा है। उम्मीद फाउंडेशन के निदेशक जावेद उल्फत ने कहा कि बच्चों के लिए मनोरंजन और खेल की सुविधाएं किसी भी शहर की बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं। उनके अनुसार नाहन में बच्चों के लिए ऐसे सुरक्षित स्थान पहले ही कम हैं और रानीताल पार्क में उपलब्ध सुविधाओं का खराब होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पार्क में बच्चों के मनोरंजन के साधन ही कबाड़ में पड़े हैं, ऐसे में शहर के बच्चों के लिए विकल्प और सीमित हो जाते हैं। नगर परिषद नाहन की अध्यक्ष उपमा धीमान ने कहा कि नई नगर परिषद ने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उन्होंने बताया कि परिषद लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि रानीताल पार्क का पुराना गौरव लौटाने के लिए प्रशासन, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों के सहयोग से प्रयास किए जाएंगे। अब देखना होगा कि ऐतिहासिक रानीताल पार्क को दोबारा बच्चों की चहचहाहट और शहरवासियों की रौनक से भरने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं। शहरवासियों की नजर इस बात पर भी है कि पार्क में खराब पड़े मनोरंजन के साधनों की मरम्मत होती है या उन्हें नए सिरे से विकसित किया जाता है।