आज के दौर में बच्चे दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते नहीं करते, बड़े बुजुर्गों के पैर छूना तो बहुत दूर की बात है। इसके लिए जिम्मेदार घरवाले ही हैं। वो अपने बच्चों को बचपन में ऐसे संस्कार ही नहीं दे रहे हैं। आईटीआई नाहन के प्रधानाचार्य अशरफ अली ने यह बात ब्रह्माकुमारी आश्रम नाहन में आयोजित विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका.., विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए कही। अशरफ अली ने कहा कि बच्चा स्कूल में बाद में जाता है लेकिन उसकी शुरुआती शिक्षा घर से ही शुरू हो जाती है। घर में यदि बच्चे को बड़ों का आदर करना सीखाएंगे तो वो करेंगे। दुर्भाग्य से आज के दौर में बच्चे को सुबह से ही मोबाइल पर कार्टून चलाकर दे देते हैं। इससे वो इसका आदी हो रहा है, आखिर बच्चे को मोबाइल की जगह संस्कारों की शिक्षा क्यूं नहीं दी जा सकती। इस अवसर पर भ्राता राजेंद्र ठाकुर, रजनी शर्मा प्रवक्ता, भावना साथी प्रवक्ता, बहन अंजना शर्मा प्रवक्ता, बहन सोनिया अग्रवाल प्रवक्ता सहित अन्य शिक्षक और अभिभावक मौजूद रहे।