सनातन धर्मसभा मंदिर जोगिंद्रनगर में चल रहे गणपति महोत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार को भक्ति और संगीत का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा पंडाल गणपति के जयकारों और भजनों से गूंज उठा। विशेष भजन कार्यक्रम में कलाकारों की सुरीली आवाज ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते और तालियां बजाते नजर आए। दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक चले कार्यक्रम में भाविक, गतिक और जोनी ठाकुर ने एक के बाद एक भजनों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया भजन कार्यक्रम की शुरुआत जोनी ठाकुर ने ‘फुला दियां क्यारियां बिच रैंहदी मेरी मां’ भजन से की। भजन की पहली प्रस्तुति के साथ ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए। इसके बाद जोनी ठाकुर ने ‘मेरी आपकी कृपा से सब काम हो रहे हैं’, ‘राधा रानी’ और ‘मेरे बांके बिहारी’ सहित कई भजन प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं ने भजनों के साथ तालियां बजाईं और कई लोग भक्ति में झूमते नजर आए। वहीं भाविक और गतिक ने ‘अच्युतम केशवम’, ‘शिव कैलाशों के वासी’ और ‘मेरे सरकार आए हैं’ जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को और भक्तिमय बना दिया। भजन कार्यक्रम में हिमालयन नर्सिंग कॉलेज और एथलेटिक सेंटर जोगिंद्रनगर के खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। खिलाड़ियों ने कलाकारों के साथ मिलकर भगवान गणपति की महिमा का गुणगान किया। इससे कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। गणपति महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी। आयोजकों के अनुसार एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर, तलकेहड़ पंचायत प्रधान शुचिका और नगर परिषद उपाध्यक्ष प्यार चंद वालिया सहित कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे। जीवन ठाकुर ने गणपति सेवा युवा मंडल के सदस्यों को सम्मानित किया। इसके अलावा भाजपा नेत्री मेघना ठाकुर, विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और महिला मंडल की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं। उन्होंने गणपति के समक्ष शीश नवाकर पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम के दौरान गणपति सेवा समिति के आयोजक सचिन सूद ने सभी गण्यमान्य अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया। गणपति महोत्सव के पांचवें दिन आयोजित भजन कार्यक्रम ने जोगिंद्रनगर के सनातन धर्मसभा मंदिर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना दिया। सुरों से सजे इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत का आनंद लेने के साथ गणपति के दरबार में अपनी आस्था भी प्रकट की।