अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को भी विभिन्न देवी-देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों से ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान रघुनाथ के शिविर तक पहुंचे और उनसे देव भेंट की। देव मिलन की यह परंपरा सुबह से शुरू हुई और देर शाम तक जारी रही। देवी-देवताओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देव मिलन की रस्मों का निर्वहन किया। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह विशेष आध्यात्मिक अनुभव रहा। देव मिलन की रस्म देखकर कई श्रद्धालु भावविभोर हो गए। शुक्रवार को अपराह्न 12:45 बजे निरमंड क्षेत्र के देवता कुई कंडा नाग और माता भुवनेश्वरी अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ से मिलने पहुंचे। भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में सैकड़ों श्रद्धालु इस पारंपरिक देव मिलन के साक्षी बने। दोनों देवी-देवताओं ने बारी-बारी से अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ से भेंट की। ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुई इस रस्म ने कुल्लू दशहरा की देव संस्कृति और परंपराओं की झलक पेश की।