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कांगड़ा: धर्मशाला के दाड़ी में 18 साल पुरानी रामलीला का आगाज, पहले दिन विष्णु लीला का मंचन

दाड़ी मेला ग्राउंड में पिछले 18 वर्षों से आयोजित की जा रही रामलीला का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन कलाकारों ने विष्णु लीला का भावपूर्ण मंचन किया। नारद मुनि के अहंकार और भगवान विष्णु की माया पर आधारित इस प्रसंग को कलाकारों ने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। मंचन देखने पहुंचे दर्शक धार्मिक कथा के विभिन्न दृश्यों में भावविभोर नजर आए। रामलीला के पहले दिन दिखाया गया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद देवर्षि नारद के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया था। उन्हें अपनी उपलब्धि पर घमंड होने लगा। नारद मुनि के इस अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से एक स्वयंवर की रचना की। प्रसंग के अनुसार, स्वयंवर में राजकुमारी को देखकर नारद मुनि उन पर मोहित हो गए। राजकुमारी को पाने की इच्छा से उन्होंने भगवान विष्णु से उनका सुंदर रूप मांगा। हालांकि, भगवान विष्णु ने उन्हें ऐसा रूप दिया कि स्वयंवर में उनका उपहास हुआ और राजकुमारी ने भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। इस घटना से नारद मुनि आहत हो गए। क्रोध में उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि उन्हें भी धरती पर मानव अवतार लेकर स्त्री वियोग सहना पड़ेगा। रामलीला में इस प्रसंग को संवादों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। दाड़ी मेला ग्राउंड में आयोजित रामलीला के पहले दिन विष्णु लीला के मंचन को दर्शकों ने सराहा। कलाकारों ने नारद मुनि के अहंकार, स्वयंवर के घटनाक्रम और भगवान विष्णु की लीला को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पिछले 18 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा के तहत इस वर्ष भी धार्मिक प्रसंगों के मंचन के साथ आयोजन शुरू हुआ। पहले दिन की प्रस्तुति ने दर्शकों को पौराणिक कथा से जोड़ने के साथ ही भक्ति और विनम्रता का संदेश दिया।

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