सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा करने वाले बहुतकनीकी संस्थान बडू के छात्र सर्वेश शर्मा के मामले में ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका सामने आई है। डीआईओ ने स्पष्ट किया है कि उसके रिकॉर्ड में सर्वेश या उससे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर करने की जानकारी नहीं है। इसके बाद संस्थान के प्राचार्य की शिकायत पर सदर थाना हमीरपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब कथित धोखाधड़ी से जुड़े डिजिटल संदेशों, दस्तावेजों और उपकरणों की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, सर्वेश को कथित तौर पर सुनियोजित डिजिटल संदेशों के माध्यम से रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) परियोजना के लिए ग्रांट मंजूर होने का विश्वास दिलाया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत केस दर्ज किया गया है। छात्र की ओर से डीआईओ के साथ 40 पन्नों के अनुबंध का दावा भी सामने आया था। पुलिस इस दस्तावेज सहित पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। एएसपी राजेश कुमार ने गुरुवार को सदर थाना टीम के साथ संस्थान पहुंचकर प्राचार्य, स्टाफ और विद्यार्थियों से जानकारी जुटाई। सितंबर में सर्वेश ने दावा किया था कि उसे सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। परियोजना के बाद उसे राज्यपाल सहित कई प्रमुख लोगों ने सम्मानित भी किया था। संस्थान के प्राचार्य चंद्रशेखर के अनुसार, छात्र ने प्रोजेक्ट की मंजूरी से संबंधित पत्र दिखाया था। उसने अपनी कंपनी बनाकर कुछ सहपाठियों को भी साथ जोड़ा था और ग्रांट मिलने पर उन्हें वेतन देने की बात कही थी। बुधवार को सर्वेश हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर अपने कमरे की बालकनी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में प्राथमिक उपचार के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां उसके जबड़े की सर्जरी हुई। उसकी टांग में भी कई फ्रैक्चर हैं। पुलिस के अनुसार, छात्र ने इसे दुर्घटना बताया है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। एसपी बलवीर ठाकुर ने बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने लोगों से साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने की अपील की।