बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और दैनिक दिनचर्या में आए बदलाव का असर लिवर स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। हमीरपुर के आयुर्वेदिक अस्पताल में आयोजित फाइब्रोस्कैन शिविर में लिवर की जांच कराने पहुंचे लोगों के आंकड़ों ने इस ओर ध्यान खींचा है। शिविर में कुल 159 लोगों के लिवर की जांच की गई। सामने आए आंकड़ों के अनुसार इनमें से करीब 85 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर के संकेत मिले। वहीं, दो मरीजों में लिवर खराब होने की स्थिति पाई गई। शिविर में फाइब्रोस्कैन तकनीक के माध्यम से लिवर में जमा वसा और उसकी कठोरता का आकलन किया गया। इस जांच से चिकित्सकों को लिवर की स्थिति का प्रारंभिक मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। फाइब्रोस्कैन लिवर की जांच की एक गैर-आक्रामक तकनीक है। इसमें सामान्य तौर पर शरीर में चीरा लगाने या सुई का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती। इसके माध्यम से मुख्य रूप से लिवर में जमा वसा और लिवर की कठोरता का आकलन किया जाता है। जांच अपेक्षाकृत कम समय में पूरी हो जाती है और आमतौर पर मरीज को विशेष असुविधा नहीं होती। लिवर में लंबे समय तक सूजन या अन्य बीमारी रहने पर फाइब्रोसिस विकसित हो सकता है। ऐसी स्थिति में लिवर के ऊतक धीरे-धीरे कठोर होने लगते हैं। फाइब्रोस्कैन इस कठोरता का आकलन करने में चिकित्सकों की मदद करता है। आयुर्वेदिक अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वनीता शर्मा ने बताया कि शिविर में लोगों की अच्छी भागीदारी रही। बड़ी संख्या में लोगों ने लिवर की जांच करवाई। शिविर में सामने आए आंकड़ों ने लोगों के बीच लिवर स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को भी रेखांकित किया है। हालांकि, किसी व्यक्ति में फैटी लिवर या लिवर की बीमारी की अंतिम स्थिति का निर्धारण चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक जांचों के आधार पर ही किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली लिवर समेत समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। किसी जांच में असामान्य परिणाम आने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।