एनआईटी हमीरपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ-6.0 के दूसरे दिन राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कांगड़ा के लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दूसरे दिन का केंद्रीय विषय विज्ञानमय भारत-विकसित भारत रहा, जिसके अंतर्गत विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। राष्ट्रीय आयोजन में शिक्षा, विज्ञान, शोध, उद्योग, मीडिया, सामाजिक क्षेत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षा महाकुंभ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि आज तकनीक दुनिया को तेजी से बदल रही है। ऐसे में समाज की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को इस योग्य बनाना चाहिए कि वे रोजगार तलाशने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बनें। कांगड़ा के लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि विज्ञान ऐसा होना चाहिए, जिसका लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर किसानों और मजदूरों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टार्टअप के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। प्रो एचएम सूर्यवंशी, निदेशक, एनआईटी हमीरपुर ने डिग्री-केंद्रित शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान के बीच की खाई को भरने पर बल दिया। राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ-6.0 के दूसरे दिन हुए विचार-विमर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा को विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना होगा।