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धर्मशाला: केंद्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के महत्व पर हुआ मंथन

Krishan Singh Updated Tue, 08 Sep 2026 05:02 PM IST

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग की ओर से आयोजित संस्कृत सप्ताह के तहत संस्कृत भाषा के महत्व, प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में संस्कृत की उपयोगिता को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान मुख्य वक्ता क्षेत्र संगठन मंत्री संस्कृत भारती नरेंद्र कुमार ने कहा कि संस्कृत को विज्ञान से अलग करना एक सुनियोजित साजिश का परिणाम रहा है। यदि विज्ञान के विद्यार्थी संस्कृत का अध्ययन करें तो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच नए शोध के रास्ते खुल सकते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला है। युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है। संस्कृत सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय में श्लोक, भाषण, अंताक्षरी सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में संस्कृत के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। नरेंद्र कुमार ने बताया कि प्राचीन काल में श्रावण पूर्णिमा को ऋषि पर्व के रूप में मनाया जाता था। वर्ष 1969 में भारत सरकार ने श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। वर्ष 1999-2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में संस्कृत वर्ष मनाया गया। इसके बाद वर्ष 2001 से श्रावण पूर्णिमा से तीन दिन पहले और तीन दिन बाद तक संस्कृत सप्ताह मनाने की परंपरा शुरू हुई।

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