नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में बिलासपुर पुलिस ने अब तस्करों की कथित कमाई पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने सात एनडीपीएस मामलों में करीब 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की है। कार्रवाई के दायरे में वाहन, बैंक खातों में जमा रकम, सोना और मकान जैसी संपत्तियां शामिल हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों और उनके परिजनों से संपत्ति अर्जित करने के वैध स्रोत को लेकर जानकारी मांगी गई थी। संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने के बाद संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने बताया कि नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब केवल मादक पदार्थ बरामद करने और आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है। नशे की तस्करी से अर्जित संपत्ति का पता लगाकर उस पर भी कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के जरिए पुलिस नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को निशाना बना रही है, ताकि तस्करी से होने वाले कथित आर्थिक लाभ पर भी रोक लगाई जा सके। पुलिस अब नशे की सप्लाई चेन और बैकवर्ड लिंकेज की भी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि नशे की खेप कहां से आती है, इसके पीछे कौन लोग जुड़े हैं और बिलासपुर तक इसकी आपूर्ति किस नेटवर्क के जरिए होती है। पुलिस के अनुसार बाहरी क्षेत्रों से जुड़े संभावित सप्लायरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सात मामलों में करीब 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज किए जाने की कार्रवाई से जांच का दायरा नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक लेनदेन तक पहुंच गया है। अब पुलिस की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर अर्जित संपत्ति का स्रोत क्या था और उसका नशे के कारोबार से कोई संबंध था या नहीं। पुलिस की ओर से सामने रखे गए इन मामलों में संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई जांच का हिस्सा है। संबंधित मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।