गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा की स्थापना की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शनि मंदिर के पास मूर्तिकारों की दुकानों पर भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। कोई बाल रूप गणेश की प्रतिमा पसंद कर रहा है तो कोई बड़े आकार की प्रतिमा की बुकिंग करा रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार इस बार गणेश उत्सव को लेकर कारोबार अच्छा रहने की उम्मीद है। मूर्तिकार शंकर कोहली, जीत सिंह, सोमनाथ, महावीर चंद, मुकेश, जोधा, मंगली और आयूष ने बताया कि गणेश प्रतिमाएं तैयार करने का काम पिछले करीब छह माह से चल रहा है। अब प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस बार बाल रूप गणेश की प्रतिमाओं के कई आकर्षक डिजाइन तैयार किए गए हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से शुरू होकर 22 हजार रुपये तक है। करीब एक फीट की मूर्ति 300 रुपये से शुरू हो रही है, जबकि दो फीट की प्रतिमाओं की कीमत डिजाइन और सजावट के अनुसार अलग-अलग है। नौ फीट से अधिक ऊंचाई की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के ऑर्डर पर तैयार की जा रही हैं। कारीगरों के अनुसार मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की मांग अधिक है। कई दिन पहले से पसंद कर रहे प्रतिमाएं श्रद्धालु कई दिन पहले से ही परिवार के साथ मूर्तियां देखने पहुंच रहे हैं। कुछ लोग दुकानों पर पहुंचकर अलग-अलग डिजाइन देखने के बाद प्रतिमा पसंद कर रहे हैं, वहीं कई श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग भी करा रहे हैं। शौरभ ने बताया कि वह परिवार के साथ गणेश जी की प्रतिमा पसंद करने पहुंचे हैं। अलग-अलग डिजाइन देखकर यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि कौन सी प्रतिमा लें। वह पिछले छह साल से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। परिवार के बच्चों में भी बप्पा को घर लाने को लेकर खास उत्साह रहता है। प्रतिमा स्थापित करने के बाद सुबह-शाम कीर्तन किया जाता है, जिसमें आसपास के लोग भी शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि गणपति बप्पा की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गणेश उत्सव के दिन कब बीत जाते हैं, इसका पता ही नहीं चलता। पंडाल लगाकर करेंगे पूजा-अर्चना आईटीआई और तिलक नगर से मूर्ति पसंद करने पहुंचे विकास शर्मा, सुमित शर्मा, सूरज प्रकाश, नीरज कश्यप और कार्तिक बिश्नोई ने बताया कि वे कई वर्षों से गणेश उत्सव मनाते आ रहे हैं। इस बार भी पंडाल लगाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। सुबह-शाम कीर्तन के साथ भगवान गणेश को भोग लगाया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उत्सव के समापन पर ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। दस दिन तक होगी गणपति की आराधना गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाले इस पर्व में श्रद्धालु घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि व समृद्धि का देवता माना जाता है। श्रद्धालु इन दिनों सुख, शांति, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं। उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होता है। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं।