आत्महत्या की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता और समय पर मदद पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएमओ डॉ. गिरीश ने बताया कि आत्महत्या से पहले व्यक्ति के व्यवहार में कई बदलाव दिखाई देते हैं। जैसे निराशा की बातें करना, खुद को परिवार पर बोझ समझना, दोस्तों और परिजनों से दूरी बनाना, नशे का सेवन बढ़ना, नींद और खानपान की आदतों में बदलाव आना। एसएमओ डॉ. कुणाल ने कहा कि ऐसे संकेत दिखने पर व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उसकी बात को ध्यान से सुनें, बिना आलोचना के भावनात्मक सहयोग दें और जरूरत पड़ने पर तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। डॉ. दीपक ने बताया कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेली मानस की 24 घंटे टोल-फ्री हेल्पलाइन 14416 शुरू की गई है। 2024 में देश में 1,70,746 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जिसमें सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़ा मानसिक स्वास्थ्य पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत को दर्शाता है।