सोनीपत। बिजली निगम के निजीकरण के विरोध और लंबित मांगों को लेकर हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को सोनीपत डिपो पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक रोडवेज कर्मचारियों ने दो घंटे तक प्रदर्शन किया। इसके बाद महाप्रबंधक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों और आगामी आंदोलन की जानकारी दी। साझा मोर्चा के नेता रामपत गोरड़, मंजीत पहल, संजीव, राजेश आंतिल व संदीप मलिक ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने 4 नवंबर तक उनकी मांगों पर परिपत्र जारी नहीं किया तो 5 और 6 नवंबर को पूरे हरियाणा में रोडवेज का चक्का जाम रहेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने संयुक्त रूप से बताया कि सरकार गुरुग्राम और नूंह जैसे मुनाफे वाले जिलों में निजी कंपनी ''पावर-11'' को 25 साल के लिए समानांतर लाइसेंस दे रही है। यह फैसला जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी है। निजीकरण से किसानों और आम उपभोक्ताओं की बिजली सब्सिडी खत्म हो जाएगी। 8 सितंबर को बनी थी सहमति, नहीं जारी हुआ परिपत्र कर्मचारी नेताओं ने बताया कि 5-6 सितंबर के हड़ताल नोटिस के बाद 8 सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक में 12 मुख्य मांगों पर सहमति बनी थी। तब एक महीने के भीतर परिपत्र (सर्कुलर) जारी करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी एक भी परिपत्र जारी नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें: - रोडवेज में प्राइवेट परमिट देने की योजना पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। - परिचालकों (कंडक्टरों) का पे-ग्रेड लिपिकों के समान कर तीन वेतन वृद्धि दी जाएं। वर्ष 2008 के वंचित परिचालकों को जल्द प्रमोशन मिले। -चालकों (ड्राइवरों) के लिए ''स्टैंड इंचार्ज'' का अलग पद सृजित कर पदोन्नति दी जाए, चालकों को हैवी पे-ग्रेड मिले और 2016 के भर्ती चालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का किया जाए। -परिचालक, निरीक्षक, उप-निरीक्षक और कर्मशाला कर्मचारियों को अर्जित अवकाश पूर्व की भांति दिए जाएं। - 2018 में भर्ती कर्मशाला (वर्कशॉप) कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति दी जाए।