जिला कारागार में मंगलवार रात को बंदियों के शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास के लिए तीन महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल शुरू की गईं। जेल में जेल रेडियो स्टेशन, लाइब्रेरी और कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया, उपायुक्त शांतनु शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल तथा पंकज खेमका ने किया। वहीं, उपायुक्त शांतनु शर्मा और अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल ने जेल के बंदियों को दिए जाने को चखा और उसकी गुणवत्ता की जांच की। जेल अधीक्षक जसवंत सिंह ने बताया कि वर्तमान में कारागार में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से तीन बंदी एमए और 15 बंदी बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के माध्यम से 40 बंदी दसवीं और बारहवीं की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उल्लास योजना के तहत 150 बंदी पढ़ना-लिखना सीख रहे हैं। इसी शैक्षणिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नई सुविधाएं शुरू की गई हैं। 10 कंप्यूटर से मिलेगा प्रशिक्षण कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष में 10 कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं। यहां बंदियों को कंप्यूटर ज्ञान, टंकण और डिजिटल शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बंदियों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने के साथ उनके शैक्षणिक, बौद्धिक और तकनीकी कौशल को विकसित करना है, ताकि रिहाई के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर तरीके से जीवनयापन कर सकें। 2500 पुस्तकों से सुसज्जित हुई लाइब्रेरी उन्होंने बताया कि नई लाइब्रेरी में 2500 पुस्तकें उपलब्ध करवाई गई हैं। इनमें करीब 2000 पुस्तकें सरसाई नाथ बुक बैंक तथा 500 पुस्तकें सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र भाटिया की ओर से उपलब्ध करवाई गई हैं। लाइब्रेरी में साहित्य, धार्मिक, कानून, ज्ञान-विज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, स्वास्थ्य और योग से संबंधित पुस्तकें रखी गई हैं। इसके अलावा समाचार पत्र और पत्रिकाएं भी उपलब्ध रहेंगी। हर बैरक में पहुंचेंगे जेल रेडियो के कार्यक्रम जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल रेडियो स्टेशन के माध्यम से बंदियों को भजन, प्रेरक कहानियां, कानूनी जानकारी, स्वास्थ्य संबंधी सुझाव और मनोरंजन कार्यक्रम सुनाए जाएंगे। जेल प्रशासन के अनुसार इससे बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने और तनाव कम करने में मदद मिलेगी। रेडियो की आवाज प्रत्येक बंदी तक पहुंचाने के लिए सभी बैरकों में स्पीकर लगाए गए हैं।