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बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू, 99 प्रतिशत कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर

रोहतक। हरियाणा में बिजली निगम कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल बुधवार रात 10 बजे से शुरू हो गई। गुरुवार को पहले दिन जिले में 99 प्रतिशत कर्मचारी और अधिकारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं। राजीव गांधी विद्युत भवन में प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी धरने पर बैठे। हाथों में लाल झंडे और बैनर लेकर प्राइवेट कंपनी को दिए गए टेंडर और पैरेलल लाइसेंस के विरोध में नारेबाजी की। एचएसबी वर्कर यूनियन के महासचिव और संयुक्त संघर्ष मोर्चा बिजली कर्मचारी व इंजीनियर्स के सीनियर मेंबर विजय हुड्डा ने कहा कि आज के दिन 99 प्रतिशत कर्मचारी और अधिकारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर हड़ताल पर हैं। हमने संजीदगी दिखाते हुए तय किया है कि हमारी लड़ाई जनमानस से नहीं, जनमानस के हित की है। इसलिए चल रही बिजली को बाधित नहीं करेंगे और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को इससे बाहर रखेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला अंत्योदय परिवारों के खिलाफ है। गुरुग्राम जैसा क्षेत्र जो पावर यूटिलिटी का एक चौथाई रेवेन्यू देता है, वहां से मिलने वाले रेवेन्यू से ही हम क्रॉस सब्सिडी के रूप में किसान को 10 पैसे प्रति यूनिट और गरीब परिवार को ढाई रुपए से कम में बिजली दे पाते हैं। हमें साढ़े 6 से 7 रुपए लागत पड़ती है, हम इंडस्ट्री को 10 से साढ़े 10 रुपए में सप्लाई करते हैं। अगर यह रेवेन्यू प्राइवेट हाथों में चला गया तो कंपनियां सस्ती बिजली नहीं दे पाएंगी या दिवालिया हो जाएंगी। यह गरीब के घर में अंधेरा करने वाला कानून है। विजय हुड्डा ने बताया कि 11-12-13 अगस्त को प्रस्तावित हड़ताल 10 अगस्त को बिजली मंत्री के आश्वासन पर स्थगित की गई थी कि न तो पैरेलल लाइसेंस होगा, न स्मार्ट मीटर का निजीकरण होगा। लेकिन, सरकार ने वादा खिलाफी की। इसलिए 2-3 दिसंबर की हड़ताल पहले से घोषित थी लेकिन लाइसेंस जारी होते ही मजबूरन अभी से हड़ताल पर जाना पड़ा। उन्होंने सरकार के इस तर्क को ड्रामा बताया कि एचईआरसी स्वायत्त संस्था है और लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। हुड्डा ने कहा कि एचईआरसी के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री व हरियाणा सरकार ही करती है। बिजली अमेंडमेंट एक्ट 2003 की धारा 108 में स्पष्ट है कि प्रदेश का मुखिया एचईआरसी के किसी भी आदेश को कभी भी निरस्त कर सकता है। मुख्यमंत्री अपनी ताकत पहचानें और इस पैरेलल लाइसेंस को रद्द करें, कर्मचारी उनकी जय-जयकार करेंगे। इस दौरान सर्कल सेक्रेटरी विकास दहिया, सुनील दहिया, संदीप गोयत, रमेंद्र मलिक, संजीत मुदगिल, परमीत हुड्डा, किसान यूनियन के नेता प्रीतसिंह, करमबीर सिवाच, धर्मराज कुंडू, नरेंद्र बल्हारा, सुनील शर्मा, संदीप राणा, दिलबाग मालिक, सोनू, जयवीर चहल आदि मौजूद रहे। ———- नागरिकों को हो सकती है परेशानी : मोर्चा मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि 22 से 24 अक्टूबर तक कर्मचारी कार्यालय कार्य नहीं करेंगे और न ही फील्ड में शिकायत समाधान और लाइन देखरेख का काम करेंगे। हालांकि आवश्यक सेवाएं बहाल रहेंगी। बावजूद इसके नागरिकों को मामूली परेशानी हो सकती है।

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