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ट्रैक पर दौड़ने का सपना टूटा तो 15 की उम्र में थामी पिस्टल, आखिरी मौके को कमलजीत ने गोल्ड में बदला

हरियाणा के रेवाड़ी के एक गांव सुलखा से निकले कमलजीत सिंह ने कभी एथलीट बनकर देश के लिए दौड़ने का सपना देखा था। ट्रैक पर स्प्रिंटर के रूप में करियर बनाने की तैयारी कर रहे कमलजीत की जिंदगी ने 2021 में अचानक करवट ली। ट्रेनिंग के दौरान लगी गंभीर चोट ने उनका एथलेटिक्स करियर खत्म कर दिया। उस समय उनकी उम्र महज 15 साल थी। जिस खेल को लेकर उन्होंने भविष्य के सपने देखे थे, वह उनसे छूट चुका था। लेकिन कमलजीत ने हार नहीं मानी। उन्होंने उसी उम्र में पिस्टल शूटिंग को अपना नया खेल बनाया। आगे की राह आसान नहीं थी। शूटिंग महंगा खेल है और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए प्रशिक्षण, यात्रा और गोलियों का खर्च उठाना चुनौती थी। कई बार ऐसा भी लगा कि आर्थिक कारणों से शूटिंग छोड़नी पड़ेगी, लेकिन परिवार उनके साथ खड़ा रहा। माता-पिता और चाचा ने कमलजीत के सपने को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बचत तक खर्च की। परिवार ने उन्हें दूसरा रास्ता चुनने के लिए मजबूर करने के बजाय उनकी नई शुरुआत में भरोसा दिखाया। वहीं गांव के शूटिंग कोच शक्तिपाल ने उन्हें शुरुआती स्तर से तैयार किया। तकनीक, एकाग्रता और निशाने की सटीकता पर लगातार काम करते हुए कमलजीत ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू की। 2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण कमलजीत ने शुरुआत में 50 मीटर पिस्टल में अपनी पहचान बनाई और बाद में 10 मीटर एयर पिस्टल पर भी फोकस किया। उनकी मेहनत रंग लाई और जूनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक मिलने लगे। वर्ष 2023 में उन्होंने आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) का समर्थन मिला और वह सीनियर टीम तक पहुंचे। व्यक्तिगत स्पर्धा में नहीं मिली जगह, मिश्रित टीम में आखिरी समय पर मौका एशियाई खेलों में कमलजीत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। वह 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं बना सके। मिश्रित टीम स्पर्धा में भी वह मूल टीम का हिस्सा नहीं थे। लेकिन किस्मत ने उन्हें एक और मौका दिया। आखिरी समय पर केदारलिंग बालकृष्ण उचागनवे के स्थान पर कमलजीत को मिश्रित टीम में शामिल किया गया। उनके साथ सुरुचि सिंह थीं। दोनों ने इस मौके को शानदार प्रदर्शन में बदल दिया। 484.6 अंक के साथ एशियाई रिकॉर्ड फाइनल में कमलजीत सिंह और सुरुचि सिंह ने 484.6 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीत लिया। इसी प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया एशियाई रिकॉर्ड भी कायम किया। यह पिछला रिकॉर्ड 481.3 अंक था। इस तरह जिस कमलजीत को कुछ समय पहले व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं मिल पाई थी, उसी ने मिश्रित टीम स्पर्धा में भारत को एशियाई खेलों का शूटिंग में स्वर्ण पदक दिला दिया। चोट ने खेल बदला, लेकिन सपना नहीं: कमलजीत की कहानी सिर्फ एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। यह उस खिलाड़ी की कहानी है, जिसका पहला खेल गंभीर चोट के कारण छूट गया, लेकिन जिसने खेल छोड़ने के बजाय अपनी मंजिल बदल दी। 15 साल की उम्र में एथलेटिक्स ट्रैक से शूटिंग रेंज तक पहुंचे कमलजीत ने परिवार के भरोसे, कोच के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से नई पहचान बनाई। आखिरी समय पर मिला मौका उनके लिए महज टीम में शामिल होने का अवसर था, लेकिन उन्होंने उसे स्वर्ण पदक और एशियाई रिकॉर्ड में बदल दिया। ट्रैक पर भारत के लिए दौड़ने का सपना देखने वाला यह युवा अब शूटिंग रेंज में देश का नाम रोशन कर चुका है।

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