जिला भर में गत रात को हुई जोरदार बारिश के बाद अनाज मंडियों के हालात बदल हो गए हैं। उत्थान की इंतजार में पड़ा धन पानी में डूब गया है। सुबह तक भी थानेसर अनाज मंडी के हालात तालाब जैसे बन रहे और श्रमिक अनाज मंडी में हूं जल भराव से धान की बोरियां निकलने में जुट गए। हालांकि आज रविवार को सुबह से ही मौसम साफ है और धूप खिल गई है जिसके चलते कुछ राहत मिली है और अनाज मंडियों में धन सुखाया जाने लगा है। थानेसर अनाज मंडी में ही करीब 7 लाख धान की बोरियां उठान की इंतजार में थी, जिसमें से अधिकतर खुले आसमान के नीचे ही पड़ी थी। हालांकि बारिश के चलते धान को तिरपालों से ढकने का प्रयास किया गया लेकिन तेज आंधी के कारण यह प्रयास भी सफल नहीं हो पाए और अधिकतर धान भीग गया। इससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। ऐसे ही हालत जिला की दूसरी मंदिरों के भी बताई जा रहे हैं। धान के उठान में गज 16 अक्टूबर को हुई बारिश के बाद भी तेजी नहीं लाई जा चुकी थी जिसका खामियाजा अब किसानों के साथ-साथ भारतीयों में राइस सेलर संचालकों को भी भुगतना पड़ा है।