ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर सोमवार को जिले के करीब 800 मेडिकल स्टोर हड़ताल पर रहे। मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों को दिनभर दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। खासकर अस्पतालों के आसपास दवा लेने पहुंचे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मेडिकल स्टोर संचालकों का विरोध केंद्र सरकार के दो नोटिफिकेशन जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) को लेकर है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि इन प्रावधानों के कारण ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां “कानूनी धुंधले क्षेत्र” में काम कर रही हैं। दवा विक्रेताओं के अनुसार ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट और व्यापक कानून लागू नहीं है, जिससे यह तय हो सके कि डॉक्टर की पर्ची की जांच कैसे होगी, दवाइयों की बिक्री किस नियम के तहत होगी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी। मेडिकल स्टोर संचालकों ने मांग की कि सरकार दोनों नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से वापस ले और ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर स्पष्ट नीति लागू करे। उनका कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवा बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। हड़ताल के कारण कई मरीजों को जरूरी दवाइयां लेने में दिक्कत आई। हालांकि कुछ अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल सुविधाएं सीमित रूप से खुली रहीं।