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हिसार: तिलहन-दलहन का दायरा बढ़ाने को सरसों-धान-मूंग फसल चक्र वालों को भी मिले सब्सिडी : प्रो. बीआर कांबोज

हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि प्रदेश के 40 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एचएयू के कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों को यह प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। किसानों को प्रमाण पत्र भी जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों की सीमित उपलब्धता तथा बढ़ती कृषि लागत को ध्यान में रखते हुए किसानों को ऐसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गेहूं- धान के चक्र को छोड़ कर सरसों- धान- मूंग के चक्र को अपनाने वाले किसानों को भी सब्सीडी दी जाए तो दोहरा फायदा होगा। इससे तिलहन व दलहन का एरिया बढ़ाने में सहयोग मिलेगा। प्रो. बीआर कांबोज एचएयू के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सभागार में कृषि अधिकारी कार्यशाला (रबी) 2026 के शुभारंभ पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।विस्तार शिक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा प्रदेश के कृषि और किसान कल्याण विभाग के सभी जिलों से कृषि अधिकारी भाग ले रहे हैं। कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि वर्तमान में फसल अवशेष प्रबंधन, फसल विविधिकरण, मृदा स्वास्थ्य व जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग करके फसल उत्पादन बढ़ाने व कृषि से जुड़ी समस्याओं का तत्परता से समाधान करने की आवश्यकता है। दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान रबी फसलों की बुवाई से पूर्व किसानों को आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण बीज, फसलवार अनुशंसित किस्मों, उर्वरक एवं सिंचाई प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध करवाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। किसानों को फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की योजना तैयार की जाएगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ रामप्रताप सिहाग ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावान्तर भरपाई योजना, मेरा पानी-मेरी विरासत, हर खेत स्वस्थ खेत, तथा मेरी फसल मेरा ब्योरा योजना की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को दी जा रही अनुदान योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय से क्षेत्रवार फसल चक्र एवं उनके मुनाफे पर अध्ययन करने, पारंपरिक खेती की प्राकृतिक या ऑरगेनिक खेती से मुनाफे के हिसाब से तुलना करने, पैदावार का अनुमान, आगे भी सभी फसलों की एडवाइजरी जारी करने, विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया। अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग ने कार्यशाला में गेहूं, सरसों, जौ तथा गन्ना सहित विभिन्न रबी फसलों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की ओर से किए गए नए शोध कार्याें पर जानकारी दी। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ नरेश कौशिक ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन नई किस्मों की सिफारिश की जाएगी। मंच संचालन डॉ. सुनील ढांडा ने किया।

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