हरियाणा सरकार की ओर से गुरुग्राम और नूंह जिलों की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने बिजली घर में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया तो तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। हड़ताल की अध्यक्षता गुरप्रीत सिंह, विजेंद्र साहू और दीपक ने संयुक्त रूप से की, जबकि मंच संचालन प्रेम शर्मा ने किया। यूनिट प्रधान खुर्शीद खान और एसटीएफआई के प्रधान सीएन भारती ने मुख्य वक्ता के रूप में कर्मचारियों को संबोधित किया। निजीकरण से महंगी हो जाएगी बिजली : कर्मचारी कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने बिजली कर्मचारियों को दिए गए आश्वासन के बावजूद गुरुग्राम और नूंह की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने की अनुमति दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ निजीकरण का विरोध करने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर इसे लागू करने की दिशा में कदम उठा रही है। इससे कर्मचारियों में रोष है। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण होने से आम जनता को महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र में बिजली की लागत बढ़ने के साथ ही मजदूर और गरीब परिवारों के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। कर्मचारियों ने प्रीपेड मीटरों को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास समय पर रिचार्ज के पैसे नहीं होने पर बिजली कटने की समस्या पैदा हो सकती है। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, उन्होंने पहले भी सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज करवाया था। सरकार ने बातचीत के दौरान दो महीने का समय मांगा था, लेकिन इसके बावजूद निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से कर्मचारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की। रतिया के करीब 300 कर्मचारी हड़ताल पर बिजली व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में रतिया बिजली घर के करीब 300 अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों के अनुसार, एसडीओ, जेई, लाइनमैन सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों की शत-प्रतिशत भागीदारी के चलते रतिया शहर के साथ-साथ करीब 75 गांवों की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, हड़ताल के पहले दिन बिजली आपूर्ति सामान्य रही। कर्मचारियों ने कहा कि यदि किसी फीडर या ग्रामीण क्षेत्र में तकनीकी खराबी आती है तो उसे ठीक करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिजली और पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हड़ताल के तीन दिन चलने के कारण कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि खराब हुई बिजली व्यवस्था को सुचारू होने में भी देरी हो सकती है। कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन प्रदर्शन में कांग्रेस नेता मंगत राम लालवास, कांग्रेस प्रधान गुरसेवक सिंह, वार्ड नंबर तीन के पार्षद कामरेड अजमेर सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ से गुरप्रीत सिंह जेई, अखिल भारतीय किसान सभा से राजेंद्र प्रसाद बाटू और शहीद भगत सिंह नौजवान सभा से परमजीत सिंह लाली पहुंचे। उन्होंने बिजली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए निजीकरण का विरोध किया। इस दौरान सतपाल सिंह, मनोज कामरा, दीपक कुमार, शेषनाथ, विनोद कुमार, अवतार सिंह, राम कुमार सिंगला सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो यूनियन के आगामी निर्णय के अनुसार आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जा सकता है।