दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में रतिया में भी विरोध देखने को मिला। इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष गुरप्रीत गोपी को शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे टोहाना रेलवे स्टेशन से पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें रतिया शहर थाना लाया गया। गुरप्रीत गोपी को रतिया थाना लाए जाने की सूचना मिलते ही इंकलाबी नौजवान सभा और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े कार्यकर्ता थाना परिसर के बाहर एकत्रित हो गए। कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला अध्यक्ष निर्भय सिंह के नेतृत्व में धरना दिया और गुरप्रीत गोपी की रिहाई की मांग की। धरने को संबोधित करते हुए निर्भय सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को हिरासत में लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा। हिरासत से नहीं दबेगी आवाज : गुरप्रीत गोपी रिहाई के बाद गुरप्रीत गोपी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों को हिरासत में लेकर आंदोलन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगा। पुलिस कार्रवाई का विरोध : रवि रतिया यूनियन नेता रवि रतिया ने कहा कि किसानों और युवाओं की आवाज को पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने गुरप्रीत गोपी को टोहाना से हिरासत में लेकर रतिया लाए जाने की कार्रवाई का विरोध किया। करीब एक घंटे तक चले धरने के बाद पुलिस ने गुरप्रीत गोपी को रिहा कर दिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने धरना समाप्त कर दिया। इस दौरान पार्षद सतपाल डडवाल, हैप्पी, बब्बू रंजीत, लखविंदर सहित इंकलाबी नौजवान सभा और किसान यूनियन के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर डिटेन किया था : थाना प्रभारी शहर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर गुरप्रीत सिंह गोपी को डिटेन किया गया था। करीब दो घंटे बाद पूछताछ पूरी होने पर उन्हें वापस भेज दिया गया।