हरियाणा सरकार ने आगामी धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है। इस बार करीब 80 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) पराली पैदा होने का अनुमान है। इसमें बासमती से 21 एलएमटी से अधिक और गैर-बासमती धान से 58 एलएमटी से अधिक पराली निकलने की संभावना है। सरकार ने करीब 45 एलएमटी पराली का इन-सीटू प्रबंधन, 10 एलएमटी का पशु चारे के रूप में इस्तेमाल और करीब 25 एलएमटी पराली को खेतों से बाहर निकालकर एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत औद्योगिक उपयोग में लाने का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के निदेशक अमित खत्री के अनुसार, कार्ययोजना में अनुमानित पराली की कम से कम 31 फीसदी यानी 25 एलएमटी मात्रा को औद्योगिक उपयोग में भेजने का लक्ष्य है। चार मिश्रित ईंधन आधारित बायोमास बिजली संयंत्र, पांच धान की पराली आधारित बायोमास परियोजनाएं, 15 अन्य उद्योग, छह सीबीजी इकाइयां, पानीपत का एक एथनॉल संयंत्र, तीन थर्मल पावर प्लांट और पेलेट निर्माता पराली की खरीद करेंगे।