सीपीआईएम के पूर्व महासचिव एवं वामपंथी नेता कॉमरेड सीताराम येचुरी की दूसरी बरसी पर शनिवार को स्वामी धर्मशाला सिटी रेलवे स्टेशन के नजदीक साम्राज्यवाद एवं सांप्रदायिकता के खिलाफ सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड सुरेंद्र मलिक ने कहा कि सीताराम येचुरी अंतरराष्ट्रीय ख्याति के वामपंथी नेता, विद्वान, लेखक एवं बुद्धिजीवी थे। उन्होंने साम्राज्यवाद के खिलाफ प्रगतिशील ताकतों को एकजुट करने के साथ देश में सांप्रदायिकता के विरुद्ध भी मजबूत संघर्ष किया। उन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की रक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। मलिक ने कहा कि 2014 के बाद संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और धर्म निरपेक्ष व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों के खिलाफ वामपंथी, धर्म निरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करने में येचुरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान संकट और मजदूरों के अधिकारों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करना आज समय की मांग है। डॉ. भीमराव आंबेडकर और शहीद भगत सिंह के सपनों पर आधारित समानता, न्याय और लोकतंत्र वाला भारत बनाना येचुरी की राजनीतिक प्रतिबद्धता का आधार था। उनकी विरासत को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। इस अवसर पर रामफल देशवाल, मास्टर शेरसिंह, राजेश कुंगड़, रणधीर कुंगड़, सुमेर धारणी, दयानंद पूनिया, सुखदर्शन सरोहा, बिमला घनघस, शीला बलियाली मौजूद रहे। संवाद