अमर उजाला सिविल लाइंस दफ्तर में महिलाओं संग संवाद का आयोजन किया गया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने नोटा के महत्व पर बात की। कहा कि नोटा से अब डर पैदा हुआ है। कई बड़े-बड़े नेता चुनाव हार गए हैं। अगर रिजल्ट का एनालिसिस किया जाए तो पता चलता है कि जितना वोट नोटा पर पड़ा, उसकी वजह से बड़े नेता हार गए और सामने वाला जीत गया। कहा, नोटा आपके प्रतिरोध का तरीका है। अगर आप अपना गुस्सा व्यक्त करना चाहते हैं तो नोटा दबाते हैं। ये वोट काउंट नहीं होता, ये आपके गुस्से को पढ़ने के लिए है। नियम तो ये होना चाहिए कि अगर नोटा पर सबसे ज्यादा वोट पड़ता है तो वहां के सारे उम्मीदवारों को निरस्त कर देना चाहिए।