डीटीसी बसों की हड़ताल का असर दूसरे दिन भी राजधानी की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। बसों के इंतजार में बस स्टॉप पर पहुंचे यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद भी एक भी बस नहीं मिली। आखिरकार थक-हारकर यात्रियों को ऑटो, कैब और रैपिडो जैसी ऑनलाइन सेवाओं का सहारा लेना पड़ा, जहां उन्हें आम दिनों की तुलना में अधिक किराया चुकाने को मजबूर होना पड़ा। बस स्टॉप पर सन्नाटा पसरा रहा, जबकि रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त किराये का बोझ बढ़ गया।