दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के शोर, नारेबाजी और समर्थकों के बीच विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के पास सड़क पर एक ऐसी तस्वीर भी नजर आई, जो लोकतंत्र के इस उत्सव से अलग जिंदगी की दूसरी कहानी बयां कर रही थी। सड़क पर बिखरे चुनावी पर्चे छोटे-छोटे बच्चों के लिए प्रचार सामग्री नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन गए थे। मासूम हाथों में पर्चों का ढेर उठाए एक बच्चे से पूछा गया तो उसने सहजता से कहा, इसको बेचने से पैसे मिलेंगे, जिससे खाने की चीजें मिल जाएंगी।