तहेरे सालों ने बहनोई को गोली से उड़ाया

Badaun Updated Mon, 05 May 2014 05:31 AM IST
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जरीफनगर/दहगवां। थाना क्षेत्र के गांव ऊमरा में तहेरे बहनोई की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ससुराल में मिली जमीन के विवाद में पनपी रंजिश की वजह से ऐसा किया गया। मृतक की पत्नी ने अपने दो चचेरे भाइयों सहित अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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जरीफनगर थाना क्षेत्र के ही मझोला गांव में रहने वाले रामनिवास (26) पुत्र ओमप्रकाश और उसके चचेरे भाई लालाराम की शादी इसी क्षेत्र के गांव ऊमरा निवासी नेकराम की बेटियों के साथ हुई थीं। नेकराम के कोई पुत्र नहीं था। इस वजह से उन्होंने अपनी संपत्ति लालाराम की पत्नी जयवंती और रामनिवास की पत्नी दयावती के नाम कर दी थी। वह ऊमरा गांव में ही अपने हक की जमीन पर रहता था और वहां आटा चक्की चलाता था।
दयावती के सगे चाचा मदनलाल का घर भी पड़ोस में है। इनके पुत्र सुखवीर ने शनिवार को अपने घर पर कथा कराई थी। इस कार्यक्रम में भोजन के लिए सुखवीर ने रामनिवास को परिवार समेत बुलाया था। इसके अलावा मझोला से उसके परिवार के ही लालाराम, जसवंत और कालाराम को भी बुलाया। दावत से पहले दोपहर में ही रामनिवास और सुखवीर में गेहूं पीसने को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। तब सुखवीर ने रामनिवास के परिवारवालों को भोजन करने से पहले ही भगा दिया। इससे झगड़ा काफी बढ़ गया। शिकायत पर आई थाना पुलिस ने दोनों तरफ के लोगों में से रामेश्वर और विजयपाल का शांतिभंग में चालान कर दिया। बताते हैं कि इससे नाराज सुखवीर, उसके भाई काले और कुछ अन्य साथियों ने मिलकर रात दस बजे करीब रामनिवास की आटा चक्की पर धावा बोल दिया। यहां नल चलाते रामनिवास की पीठ पर गोली मार दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। रात में घरवाले उसे दहगवां अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में ही रामनिवास की मौत हो गई। रविवार को उसके शव का पोस्टमार्टम कराया गया। दयावती ने सुखवीर, काले समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ पति की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कुनबे की जमीन जाने से खफा थे रिश्तेदार
जरीफनगर। सालों के हाथ बहनोई की हत्या जैसी वारदात में वजह जमीन रंजिश ही रही है। ऊमरा के निवासी नेकराम, रामेश्वर और मदनपाल तीन सगे भाई थे। इसमें नेकराम के कोई बेटा नहीं था। उनकी दो बेटी दयावती और जयवंती ही थीं। उनकी पत्नी ने 15 बीघा भूमि का आधा भाग जयवंती और आधा भाग दयावती के नाम कर दिया। ससुराल में जमीन मिली तो रामनिवास अपना गांव मझोला छोड़कर आ गया था। ससुराल में वह ठाठ से रहता था। जमीन की खेती के अलावा चक्की लगाकर भी वह कमाई कर लेता था। इस बात से उसके तहेरे साले सुखपाल आदि को जलन होती थी। वह बेटियों को जमीन देने के ताऊ के निर्णय से असहमत थे। उनकी जमीन-मकान पर वह अपना हक मानते थे और इसके हाथ से चले जाने से काफी आहत थे। शायद इसीलिए वह रामनिवास से रंजिश निकालने का मौका खोजते थे। रामनिवास अपने पीछे दो बेटियां छोड़ गया है। इनमें एक बेटी दो वर्ष की तो दूसरी पांच वर्ष की है।
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