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किसानों ने जाम किया दातागंज रोड

Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
Badaun
Badaun Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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सिलहरी (बदायूं)। सेंटर पर गन्ना न पड़ने से नाराज सैकड़ों किसानों ने शुक्रवार को दातागंज रोड पर जमा लगा दिया। ये किसान पर्ची न मिलने से खफा थे। इन्होंने आरोप लगाया कि पर्ची लेने के लिए उनसे सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। बेवजह उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। जाम की खबर मिलने पर पहुंचे एडीएम (वित्त एवं राजस्व) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी तरह किसानों को समझा बुझाकर जाम को खुलवाया। इस बीच करीब ढाई घंटे लगे रहे जाम के कारण रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं।
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तहसील सदर क्षेत्र के गांव किसरुआ के अधिकांश किसान गन्ने की पैदावार करते हैं। शेखूपुर स्थित सहकारी चीनी मिल का सेंटर उनके गांव में लगा है। यहां पर गन्ने की तौल होती है। मिल से ही उन्हें पर्ची दी जाती है। कई दिनों से लाइन में लगे गन्ना किसानों को जब पर्ची नहीं मिली तो वह सड़क पर उतर आए। सुबह करीब 10 बजे सैकड़ों की संख्या में गन्ना किसानों ने दातागंज रोड पर गन्ना सेंटर के पास जाम लगा दिया। गुस्साए किसान जिला गन्ना अधिकारी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
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जाम के कारण रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इसकी सूचना पर डीसीओ सुशील कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट जमीर आलम मौके पर पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट ने किसानों की बात को सुनकर जाम खोलने को कहा, लेकिन किसानों ने उनकी एक न मानी।
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सिटी मजिस्ट्रेट ने तत्काल ही इसकी सूचना आला अफसरों को दे दी। कुछ ही देर बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व जयंत कुमार दीक्षित भी जाम स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों से बात की। कहा कि उनकी समस्या जायज है। उसे दूर किया जाएगा। एडीएम का आश्वासन मिलने पर करीब ढाई घंटे बाद आक्रोशित किसानों ने जाम खोल दिया।
देखने लायक था डीसीओ का चेहरा
जिस समय गन्ना किसान एडीएम के सामने ही उन पर पर्ची देने पर सुविधा शुल्क वसूले जाने का आरोप लगा रहे थे, तब डीसीओ कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं लग रहे थे। वो भी किसानों के आक्रोश को देख शांत ही खड़े रहे।
वर्जन-
किसानों के आरोप निराधार हैं। किसानों को कैलेंडर के हिसाब से ही पर्चियां जारी की जा रही हैं। यदि उन्हें पर्चियां समय से नहीं मिलने की शिकायत है तो, उसे दूर किया जाएगा। सुशील कुमार जिला गन्ना अधिकारी,बदायूं
किसान कहिन-
-जब वह पर्ची लेने डीसीओ के पास पहुंचे तब उन्होंने एक हजार रुपये की मांग की। कहा था कि रुपये मिलने पर ही पर्ची मिलेगी। अनेस यादव, किसरुआ
-गेहूं बोने के लिए खेत खाली करना है, लेकिन अभी तक उन्हें गन्ना देने के लिए पर्ची ही नहीं मिल पाई है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो वह कुछ भी कर सकते हैं।-चुन्नी लाल यादव, किसरुआ

-पेड़ी गन्ना है उसे डालकर ही गेहूं बोएंगे। जब समय से गन्ना ही नहीं बिक पाएगा तब वह कैसे गेहूं बो पाएंगे। संतोष यादव, किसरुआ
-इस बार गन्ना मिल तक पहुंचाने के लिए काफी दिक्कतें उठानी पड़ रहीं हैं। किसान के दर्द को कोई नहीं समझ पाता। मिल के अधिकारी-कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। राकेश कुमार, किसरुआ

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