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Bangladesh: 'यूनुस सरकार अवैध, चुनाव के बाद बदलेगी तस्वीर', मानवाधिकार कार्यकर्ता मंजिल मुर्शिद का बड़ा दावा
Sat, 28 Jun 2025 02:21 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 28 Jun 2025 02:21 PM IST
सार
मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद ने कहा कि बांग्लादेश ने 5 अगस्त के बाद कानून के अनुसार काम नहीं किया। मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के रूप में सत्ता में आए। जबकि संविधान में कार्यवाहक सरकार के बारे में कोई प्रावधान नहीं है।
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मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
विस्तार
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और चुनावों को लेकर प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मंजिल मुर्शिद ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस सरकार बांग्लादेश के संविधान के तहत वैध नहीं है। उम्मीद है कि आगामी चुनाव से लोकतांत्रिक अधिकार की स्थापना होगी और इसके बाद तस्वीर बदलेगी।
मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद ने कहा कि बांग्लादेश ने 5 अगस्त के बाद कानून के अनुसार काम नहीं किया। मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के रूप में सत्ता में आए। जबकि संविधान में कार्यवाहक सरकार के बारे में कोई प्रावधान नहीं है। पांच अगस्त के बाद एक साजिश हुई। देश लोगों की मांग के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराने के लिए आगे नहीं बढ़ा।
मुर्शिद ने कहा कि अब अगर चुनाव होते हैं, तो तस्वीर बदलेगी। जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो हमें उम्मीद है कि हमारे लोकतांत्रिक अधिकार स्थापित होंगे। वहीं एक राजनीतिक दल किसी अन्य राजनीतिक दल को काम करने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता, क्योंकि राजनीतिक दल मूल रूप से राजनीति और लोकतंत्र के बारे में होते हैं। लेकिन मौजूदा सरकार एक राजनीतिक दल की सरकार नहीं है।
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ये भी पढ़ें: मंदिर पर बुलडोजर एक्शन को लेकर भारत की आपत्ति के बाद बैकफुट पर बांग्लादेश, यूनुस सरकार ने दी सफाई
उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने सत्ता संभाली और लंबे समय तक उन्होंने चुनाव के बारे में कुछ नहीं कहा। वे हमेशा कहते रहे कि कई तरह के सुधारों को पूरा करने के बाद पांच साल लगते हैं, वे चुनाव की घोषणा करेंगे। सरकार के कुछ समर्थक भी इस विचार को साझा करते हैं। जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने चुनाव के बारे में आवाज उठाई, तो तस्वीर बदली।
मोहम्मद यूनुस की सरकार टालना चाहती थी चुनाव
मुर्शिद ने कहा कि पहले अंतरिम सरकार 2026 तक चुनाव टालना चाहती थी। जब मोहम्मद यूनुस लंदन गए और बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मिले। इसके बाद एक संयुक्त घोषणा जारी की कि फरवरी में चुनाव होंगे। लेकिन अभी भी निश्चित नहीं हैं क्योंकि चुनाव आयोग ने अभी तक कार्यक्रम घोषित नहीं किया है।
दबाव में की गई अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा
मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद ने कहा कि पहले मोहम्मद यूनुस कहते थे कि हम अवामी लीग पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे। इसके बाद जब हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल हामिद देश छोड़कर चले गए, तो कुछ छात्र नेताओं और सरकार के सहयोगियों ने आवाज उठाई और तर्क दिया कि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब एनसीपी और जमात-ए-इस्लामी ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। सरकार ने राजनीतिक दलों से चर्चा की और घोषणा की कि अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि अवामी लीग काम नहीं कर सकती। अगर राजनीतिक दल काम नहीं कर सकता, तो इसका मतलब है कि राजनीतिक दल का अस्तित्व कहीं नहीं है।मुर्शिद ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस समय ढाका लौटने की कोई संभावना नहीं है। देश छोड़ने का उनका फैसला उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सही था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नहीं होंगे चुनाव
उन्होंने कहा कि अगर अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई तो अगले चुनाव पर सवाल उठेंगे। पिछली सरकार के दौरान सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने कहा था कि ऐसे चुनाव होने चाहिए जिसमें सभी राजनीतिक दल भाग लें। पिछले तीन चुनावों में बड़ी पार्टी बीएनपी ने भाग नहीं लिया। इसलिए चुनाव स्वीकार नहीं किया गया। आने वाले चुनाव में प्रमुख पार्टी अवामी लीग है। अगर अवामी लीग चुनाव में भाग नहीं लेती है या सरकार भाग लेने का मौका नहीं देती है, तो चुनाव संदिग्ध होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कानूनी प्रावधानों के अनुसार जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण बहाल कर दिया है। जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत होने का कानूनी अधिकार है।
ये भी पढ़ें: यूनुस सरकार बांग्लादेश में पिछले तीन चुनावों की करेगी जांच, समिति गठित; हसीना की बढ़ेगी मुश्किल?
भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की जरूरत
मुर्शिद ने भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है। भारत के साथ हमारी सीमा बहुत बड़ी है। भारत में कुछ लोग जैसे कि पश्चिम बंगाल के लोग, एक जैसी भाषा और संस्कृति साझा करते हैं। हम भारत जाते थे। भारत में हमारे हजारों रिश्तेदार हैं। हम इलाज और खरीदारी के लिए वहां जाते थे, लेकिन वीजा समस्या के कारण यह सब बंद हो गया है। सरकार और विपक्ष दोनों को राजनीतिक पहलू पर विचार किए बिना अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्हें बैठकर अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए और हमारे विदेश मंत्रालयों के माध्यम से अच्छे संबंध बनाने चाहिए।
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मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद ने कहा कि बांग्लादेश ने 5 अगस्त के बाद कानून के अनुसार काम नहीं किया। मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के रूप में सत्ता में आए। जबकि संविधान में कार्यवाहक सरकार के बारे में कोई प्रावधान नहीं है। पांच अगस्त के बाद एक साजिश हुई। देश लोगों की मांग के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराने के लिए आगे नहीं बढ़ा।
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मुर्शिद ने कहा कि अब अगर चुनाव होते हैं, तो तस्वीर बदलेगी। जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो हमें उम्मीद है कि हमारे लोकतांत्रिक अधिकार स्थापित होंगे। वहीं एक राजनीतिक दल किसी अन्य राजनीतिक दल को काम करने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता, क्योंकि राजनीतिक दल मूल रूप से राजनीति और लोकतंत्र के बारे में होते हैं। लेकिन मौजूदा सरकार एक राजनीतिक दल की सरकार नहीं है।
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उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने सत्ता संभाली और लंबे समय तक उन्होंने चुनाव के बारे में कुछ नहीं कहा। वे हमेशा कहते रहे कि कई तरह के सुधारों को पूरा करने के बाद पांच साल लगते हैं, वे चुनाव की घोषणा करेंगे। सरकार के कुछ समर्थक भी इस विचार को साझा करते हैं। जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने चुनाव के बारे में आवाज उठाई, तो तस्वीर बदली।
मोहम्मद यूनुस की सरकार टालना चाहती थी चुनाव
मुर्शिद ने कहा कि पहले अंतरिम सरकार 2026 तक चुनाव टालना चाहती थी। जब मोहम्मद यूनुस लंदन गए और बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मिले। इसके बाद एक संयुक्त घोषणा जारी की कि फरवरी में चुनाव होंगे। लेकिन अभी भी निश्चित नहीं हैं क्योंकि चुनाव आयोग ने अभी तक कार्यक्रम घोषित नहीं किया है।
दबाव में की गई अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा
मानवाधिकार और शांति बांग्लादेश (एचआरपीबी) के अध्यक्ष मंजिल मुर्शिद ने कहा कि पहले मोहम्मद यूनुस कहते थे कि हम अवामी लीग पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे। इसके बाद जब हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल हामिद देश छोड़कर चले गए, तो कुछ छात्र नेताओं और सरकार के सहयोगियों ने आवाज उठाई और तर्क दिया कि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब एनसीपी और जमात-ए-इस्लामी ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। सरकार ने राजनीतिक दलों से चर्चा की और घोषणा की कि अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि अवामी लीग काम नहीं कर सकती। अगर राजनीतिक दल काम नहीं कर सकता, तो इसका मतलब है कि राजनीतिक दल का अस्तित्व कहीं नहीं है।मुर्शिद ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस समय ढाका लौटने की कोई संभावना नहीं है। देश छोड़ने का उनका फैसला उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सही था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नहीं होंगे चुनाव
उन्होंने कहा कि अगर अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई तो अगले चुनाव पर सवाल उठेंगे। पिछली सरकार के दौरान सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने कहा था कि ऐसे चुनाव होने चाहिए जिसमें सभी राजनीतिक दल भाग लें। पिछले तीन चुनावों में बड़ी पार्टी बीएनपी ने भाग नहीं लिया। इसलिए चुनाव स्वीकार नहीं किया गया। आने वाले चुनाव में प्रमुख पार्टी अवामी लीग है। अगर अवामी लीग चुनाव में भाग नहीं लेती है या सरकार भाग लेने का मौका नहीं देती है, तो चुनाव संदिग्ध होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कानूनी प्रावधानों के अनुसार जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण बहाल कर दिया है। जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत होने का कानूनी अधिकार है।
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भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की जरूरत
मुर्शिद ने भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है। भारत के साथ हमारी सीमा बहुत बड़ी है। भारत में कुछ लोग जैसे कि पश्चिम बंगाल के लोग, एक जैसी भाषा और संस्कृति साझा करते हैं। हम भारत जाते थे। भारत में हमारे हजारों रिश्तेदार हैं। हम इलाज और खरीदारी के लिए वहां जाते थे, लेकिन वीजा समस्या के कारण यह सब बंद हो गया है। सरकार और विपक्ष दोनों को राजनीतिक पहलू पर विचार किए बिना अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्हें बैठकर अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए और हमारे विदेश मंत्रालयों के माध्यम से अच्छे संबंध बनाने चाहिए।
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