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World: रूस से आए तेल टैंकर को फ्रांस ने समुद्र में रोका; जर्मनी ने रूसी जासूसी मामले में राजनयिक को निकाला

Thu, 22 Jan 2026 09:07 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 22 Jan 2026 09:07 PM IST
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World Updates of 22 Jan: World News In Hindi, US, China, Pakistan, Iran, Nepal, Asia, Politics, Crime Updates
दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : amar ujala graphics

फ्रांस की नौसेना ने ब्रिटेन से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर भूमध्य सागर में रूस से आए एक तेल टैंकर को रोका है। जहाज का नाम ‘ग्रिंच’ बताया गया है, जो कथित तौर पर फर्जी झंडे के तहत चल रहा था। फ्रांसीसी नौसेना जहाज को जांच के लिए बंदरगाह ले जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और रूस पर लगे प्रतिबंधों को लागू करने के लिए की गई है। अधिकारियों के अनुसार जहाज पर मौजूद क्रू भारतीय है और जहाज कोमोरोस द्वीप के फर्जी झंडे के तहत चलाया जा रहा था।

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जर्मनी ने रूसी जासूसी मामले में राजनयिक को देश से निकाला
जर्मनी ने रूस के एक राजनयिक को देश से बाहर निकाल दिया है। यह कार्रवाई एक महिला की गिरफ्तारी के बाद की गई, जिस पर यूक्रेन युद्ध से जुड़ी संवेदनशील जानकारी रूस को देने का आरोप है।
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जर्मन सरकार ने कहा कि वह जासूसी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी, खासकर जब वह राजनयिक पहचान की आड़ में हो। गिरफ्तार महिला जर्मन-यूक्रेनी नागरिक है और उस पर ड्रोन, रक्षा ठिकानों और सैन्य जानकारी साझा करने का आरोप है। मामले में पूर्व सैन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।

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ऑस्ट्रेलियाई संसद ने पारित किए हेट-स्पीच विरोधी कानून
ऑस्ट्रेलिया की संसद ने सिडनी के बॉन्डी तट पर हुए आतंकी हमले के जवाब में सख्त बंदूक नियंत्रण और हेट-स्पीच (नफरती भाषण) विरोधी कानून पारित कर दिए हैं। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने बुधवार को इस फैसले का स्वागत किया। पिछले महीने एक यहूदी उत्सव के दौरान पिता-पुत्र हमलावरों ने 15 लोगों की हत्या कर दी थी। नए कानूनों के तहत हथियारों के स्वामित्व पर प्रतिबंध लगाया गया है और सरकार द्वारा हथियारों को वापस खरीदने का कार्यक्रम शुरू होगा।

श्रीलंका के 30 जजों को भोपाल की अकादमी में मिला प्रशिक्षण
श्रीलंका के 30 जिला न्यायाधीशों ने भोपाल स्थित भारतीय राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम) में भाग लिया। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, 12 से 16 जनवरी तक चले इस कार्यक्रम का आयोजन श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट के अनुरोध पर किया गया था। सप्ताह भर चले इस प्रशिक्षण में जुवेनाइल जस्टिस, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और तनाव प्रबंधन जैसे 11 महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। न्यायाधीशों ने सांस्कृतिक अनुभव के लिए सांची का दौरा भी किया।

श्रीलंका में शुरू हुआ भारत के सहयोग से बना तीसरा बेली ब्रिज
श्रीलंका के मध्य प्रांत में बुधवार को भारत द्वारा निर्मित तीसरे बेली ब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया। यह पुल चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका के पुनर्निर्माण के लिए भारत के 45 करोड़ डॉलर के सहायता पैकेज का हिस्सा है। भारतीय उप-उच्चायुक्त डॉ सत्यांजल पांडेय और सांसद मंजुला सुरवीरा अराची ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया।

दक्षिण कोरिया- पूर्व पीएम हान को विद्रोह के लिए 23 वर्ष जेल
दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया कि देश के तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 2024 में लगाया गया मार्शल लॉ विद्रोह का कृत्य था। अदालत ने इस मामले में भूमिका के लिए देश के पूर्व पीएम हान डक-सू को 23 साल की सजा सुनाई। यून पहले अधिकारी थे जिसे मार्शल लॉ में दोषी ठहराया गया।

देशद्रोह मामले में हसीना पर नौ फरवरी को तय होंगे आरोप
बांग्लादेश की एक अदालत ने अपदस्थ पीएम शेख हसीना और 258 अन्य के विरुद्ध देशद्रोह केस में आरोप तय करने के लिए 9 फरवरी की तारीख तय की है। यह केस 19 दिसंबर, 2024 को जॉय बांग्ला ब्रिगेड की बैठक से जुड़ा है। आरोप है कि हसीना और अवामी लीग के सैकड़ों सदस्यों ने ब्रिगेड की ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लिया और यूनुस के नेतृत्व गिराने की साजिश रची।

IS कैदियों की शिफ्टिंग शुरू, अमेरिका ने 150 आतंकियों को सीरिया से इराक भेजा
अमेरिकी सेना ने इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े आतंकियों को सीरिया से इराक भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में 150 कैदियों को सीरिया के हसाका प्रांत से सुरक्षित इलाकों में इराक पहुंचाया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि इन आतंकियों को ज्यादा सुरक्षित और नियंत्रित जेलों में रखा जा सके। यह फैसला तब लिया गया जब सीरिया सरकार की सेना ने अल-होल कैंप का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। पहले यह इलाका अमेरिका समर्थित कुर्द बल SDF के पास था। अल-होल कैंप में अब भी करीब 24 हजार लोग रह रहे हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। ये सभी किसी न किसी रूप में IS से जुड़े परिवारों के सदस्य हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक भविष्य में करीब 7 हजार IS कैदियों को सीरिया से इराक भेजा जा सकता है। यह इलाका पहले से ही अस्थिर है और यहां बार-बार हिंसा और जेल से भागने की घटनाएं होती रही हैं। कैंप में रहने वाली महिलाओं ने हालात को बेहद खराब बताया है। उनका कहना है कि वहां न पानी है, न इलाज, न सही खाना। कई परिवार अपने-अपने देशों में वापस जाना चाहते हैं। हालांकि कुछ लोगों को डर है कि इतनी बड़ी संख्या में आतंकियों का ट्रांसफर इराक के लिए नई सुरक्षा चुनौती बन सकता है। अमेरिका और इराक दोनों का कहना है कि यह कदम आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए जरूरी है।

ट्रंप बनाम फेड: सुप्रीम कोर्ट लिसा कुक के साथ खड़ा दिखा
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद से हटाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश को रोक सकता है। ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं, जिसे लिसा कुक ने सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायाधीशों का मानना है कि अगर फेड के गवर्नर को इस तरह हटाया गया तो इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी। जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि इससे फेड की निष्पक्षता पर गहरा असर पड़ेगा।

आरोप है कि लिसा कुक ने 2021 में दो मकानों को “प्राइमरी रेजिडेंस” बताया, जिससे कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। लेकिन उनके वकील ने कहा कि यह सिर्फ एक दस्तावेजी गलती थी, कोई धोखाधड़ी नहीं। ट्रंप की असली मंशा ब्याज दरों पर कंट्रोल पाने की मानी जा रही है। वे चाहते हैं कि फेड तेजी से ब्याज दर घटाए ताकि कर्ज सस्ता हो और सरकार को फायदा मिले। लेकिन फेड महंगाई के डर से ऐसा करने से बच रहा है। सुप्रीम कोर्ट अगर कुक को पद पर बनाए रखता है तो यह ट्रंप के लिए बड़ा झटका होगा और फेड की आजादी को मजबूत करेगा।
 

एप्सटीन केस: क्लिंटन दंपती पर कांग्रेस की अवमानना की तलवार
अमेरिका में हाउस रिपब्लिकन नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ कांग्रेस की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला कुख्यात कारोबारी और यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से जुड़ी जांच से संबंधित है। कांग्रेस चाहती है कि क्लिंटन दंपती गवाही दें, लेकिन उनका कहना है कि सबपोना कानूनी नहीं है। रिपब्लिकन नेता जेम्स कॉमर ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह पूर्व राष्ट्रपति ही क्यों न हो।

अगर अवमानना प्रस्ताव पास होता है तो मामला न्याय विभाग को जाएगा और सैद्धांतिक रूप से जेल तक की सजा संभव है। हालांकि ऐसा पहले किसी पूर्व राष्ट्रपति के साथ नहीं हुआ। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि जांच का फोकस क्लिंटन पर नहीं बल्कि एप्सटीन के पूरे नेटवर्क पर होना चाहिए। क्लिंटन दंपती पहले ही लिखित बयान दे चुके हैं कि उन्हें एप्सटीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी।

ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस, दुनिया को एक मंच पर लाने की कोशिश
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस नाम से एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच बनाया है। इसका मकसद दुनिया के बड़े संघर्षों में मध्यस्थता करना है, खासकर गाजा जैसे विवादों में। करीब 30 देश इस बोर्ड में शामिल होने के लिए तैयार हैं, जबकि कई यूरोपीय देशों ने दूरी बना ली है। लगभग 50 देशों को न्योता भेजा गया है। ट्रंप इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद करेंगे। उनका कहना है कि अमेरिका को अब सिर्फ युद्ध नहीं, शांति के लिए भी नेतृत्व करना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि यह बोर्ड ज्यादा राजनीतिक है, जबकि समर्थक मानते हैं कि यह वैश्विक कूटनीति में अमेरिका की पकड़ मजबूत करेगा।

गिनी-बिसाऊ में चुनाव का एलान, तख्तापलट के बाद लोकतंत्र की वापसी की तैयारी
अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ की सैन्य सरकार ने दिसंबर 6 को चुनाव कराने का ऐलान किया है। यह फैसला पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद लिया गया है। सेना प्रमुख जनरल होर्ता इंता-आ ने कहा कि हालात अब निष्पक्ष चुनाव के लिए तैयार हैं। देश लंबे समय से तख्तापलट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। यह देश ड्रग तस्करी का बड़ा केंद्र भी बन चुका है, जिससे राजनीति और कमजोर हुई है। चुनाव से उम्मीद है कि लोकतंत्र की वापसी होगी।

लंदन में गूंजा सेव बांग्लादेशी हिंदू, अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ प्रदर्शन
लंदन के संसद भवन के बाहर ब्रिटिश हिंदुओं ने बांग्लादेश में हो रहे अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। लोगों ने तख्तियां उठाईं जिन पर लिखा था – सेव बांग्लादेशी हिंदू। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं। ब्रिटिश सरकार से अपील की गई कि वह बांग्लादेश पर दबाव बनाए। ब्रिटेन सरकार ने हिंसा की निंदा की और निष्पक्ष चुनावों की मांग की है।

मेक्सिको ने 37 कार्टेल सदस्यों को अमेरिका भेजा, राष्ट्रपति बोलीं- यह हमारा फैसला था
मेक्सिको ने 37 ड्रग कार्टेल सदस्यों को अमेरिका भेज दिया है। राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबाम ने कहा कि यह फैसला दबाव में नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया। अमेरिका ने इसे बड़ी सफलता बताया है। ट्रंप प्रशासन ड्रग कार्टेल के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।


घर सस्ते करने की ट्रंप की योजना: कम ब्याज, निवेशकों पर रोक
डोनाल्ड ट्रंप ने घरों को सस्ता बनाने के लिए बड़ा प्लान पेश किया है। वे ब्याज दरें घटवाना चाहते हैं और बड़ी कंपनियों को मकान खरीदने से रोकना चाहते हैं। उनका कहना है- 'घर लोगों के लिए हैं, कंपनियों के लिए नहीं।' इससे आम अमेरिकी परिवारों को घर खरीदने में राहत मिलने की उम्मीद है।

अमेरिकी सरकार की चेतावनी- हैती के राजनेता देश में अस्थिरता फैलाएंगे तो कार्रवाई करेंगे

अमेरिका ने बुधवार को हैती की अंतरिम परिषद को चेतावनी दी कि अगर राजनेता देश में अस्थिरता फैलाएंगे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक्स पर साझा किए गए एक बयान में, हैती के अमेरिकी दूतावास ने लिखा, 'संयुक्त राज्य अमेरिका यह मानेगा कि कोई भी व्यक्ति जो ऐसी अस्थिरता फैलाने वाली पहल का समर्थन करता है, जो गैंग्स के पक्ष में है, वह संयुक्त राज्य अमेरिका, क्षेत्र और हैती के लोगों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है, और उसके खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।' यह बयान तब आया जब परिषद के कुछ सदस्य हैती के प्रधानमंत्री एलिक्स डिडिएर फिल्स-एम के साथ मतभेद में हैं, हालांकि यह तुरंत स्पष्ट नहीं था कि ऐसा क्यों है। परिषद ने बुधवार को बंद दरवाजों के पीछे बैठक की थी।

 

मलयेशिया के पूर्व सेना प्रमुख पर रक्षा घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप


मलयेशिया के पूर्व सेना प्रमुख पर गुरुवार को रक्षा सौदों में कथित भ्रष्टाचार की जांच के बाद 21 लाख रिंगिट ($519,000) से ज़्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया। हालांकि 57 साल के हाफिज़ुद्दीन जेंटन ने खुद पर लगे आरोपों को नकार दिया और खुद को निर्दोष बताया। जेंटन अगर दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 15 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

गवाही देते हुए रो पड़े प्रिंस हैरी, बोले- प्रकाशक ने पत्नी मेगन की जिंदगी मुश्किल बना दी है

ब्रिटेन के प्रिंस हैरी बुधवार को डेली मेल टैब्लॉइड अखबार के प्रकाशक के खिलाफ चल रहे मुकदमे में अपनी गवाही के दौरान भावुक हो गए। गवाही के दौरान उनकी आंखें भर आईं और उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटिश मीडिया ने उनकी पत्नी मेगन मर्केल की जिंदगी पूरी तरह मुश्किल बना दी। प्रिंस हैरी ने दावा किया कि उनकी जिंदगी की अंदरूनी बातें छापने के लिए सही स्त्रोत का इस्तेमाल नहीं किया और अवैध तरीके से जानकारी जुटाई गई। उन्होंने कहा कि लाइमलाइट में रहने के चलते और ब्रिटिश मीडिया के खिलाफ उनकी लड़ाई का उन पर और उनके परिवार पर गंभीर असर पड़ा है। लंदन की हाई कोर्ट में आंसू रोकते हुए प्रिंस हैरी ने कहा, 'वे मेरा पीछा करना नहीं छोड़ रहे हैं, उन्होंने मेरी पत्नी की ज़िंदगी बहुत मुश्किल बना दी है।'
 

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बड़ा संकेत
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद से हटाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश को रोक सकता है। ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं, जिसे लिसा कुक ने सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायाधीशों का मानना है कि अगर फेड के गवर्नर को इस तरह हटाया गया तो इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी। जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि इससे फेड की निष्पक्षता पर गहरा असर पड़ेगा।आरोप है कि लिसा कुक ने 2021 में दो मकानों को “प्राइमरी रेजिडेंस” बताया, जिससे कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। लेकिन उनके वकील ने कहा कि यह सिर्फ एक दस्तावेजी गलती थी, कोई धोखाधड़ी नहीं।

ट्रंप की असली मंशा ब्याज दरों पर कंट्रोल पाने की मानी जा रही है। वे चाहते हैं कि फेड तेजी से ब्याज दर घटाए ताकि कर्ज सस्ता हो और सरकार को फायदा मिले। लेकिन फेड महंगाई के डर से ऐसा करने से बच रहा है। सुप्रीम कोर्ट अगर कुक को पद पर बनाए रखता है तो यह ट्रंप के लिए बड़ा झटका होगा और फेड की आजादी को मजबूत करेगा।

अमेरिका- अंतरिम अटॉर्नी लिंडसे ने पद छोड़ा, नियुक्ति पर था विवाद
अंतरिम अमेरिकी अटॉर्नी लिंडसे हैलिगन ने अपना 120 दिन का कार्यकाल समाप्त होने पर पद छोड़ दिया है। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नियुक्त किया था। हैलिगन की नियुक्ति को दो महीने पहले एक अदालत ने अवैध घोषित कर दिया था। बिना अनुभव उन्होंने पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी और न्यूयॉर्क अटार्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए थे, जिन्हें बाद में अदालत ने खारिज कर दिया।

मिनेसोटा- आप्रवासन अभियान को लेकर कानूनी विवाद गहराया
अमेरिका राज्य मिनेसोटा में संघीय अधिकारियों के बड़े आप्रवासन प्रवर्तन अभियान को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। संघीय अभियोजकों ने गवर्नर टिम वाल्ज और पांच अन्य अधिकारियों को ग्रैंड जूरी के समन भेजे हैं। जांच इस बात की हो रही है कि क्या स्थानीय अधिकारियों ने मिनेपोलिस-सेंट पॉल क्षेत्र में चल रहे अभियान में बाधा डाली। समन पाने वालों में अटार्नी जनरल कीथ एलिसन और मिनेपोलिस व सेंट पॉल के मेयर भी शामिल हैं। यह कदम अभियान को रोकने के लिए दायर मुकदमे के बाद उठाया है।

 

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