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World: ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर प्रतिबंध; म्यांमार में कैदियों की सजा माफ, पूर्व राष्ट्रपति भी रिहा
Sat, 18 Apr 2026 02:51 PM IST
Nitin Gautam
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 18 Apr 2026 02:51 PM IST
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- फोटो : amar ujala graphics
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अमेरिका ने ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूहों के सात वरिष्ठ कमांडरों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन समूहों में कताइब हिजबुल्ला और असाइब अहल अल-हक जैसे संगठन शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन कमांडरों पर क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों और गठबंधन बलों पर हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह कदम इराक में ईरान के प्रभाव को कम करने और अमेरिकी हितों के खिलाफ आगे की हिंसा को रोकने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
यह कार्रवाई इस बात का भी संकेत है कि अमेरिका केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव का इस्तेमाल कर ईरान के सहयोगी नेटवर्क को निशाना बना रहा है। साथ ही, वैश्विक बैंकों और कंपनियों को चेतावनी दी गई है कि वे इन समूहों से जुड़े लोगों के साथ कारोबार न करें। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'हम ईरान समर्थित इराकी आतंकवादी मिलिशिया को अमेरिकी नागरिकों या हितों को खतरे में डालने की अनुमति नहीं देंगे। इन समूहों की हिंसा को बढ़ावा देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।'
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यह कार्रवाई इस बात का भी संकेत है कि अमेरिका केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव का इस्तेमाल कर ईरान के सहयोगी नेटवर्क को निशाना बना रहा है। साथ ही, वैश्विक बैंकों और कंपनियों को चेतावनी दी गई है कि वे इन समूहों से जुड़े लोगों के साथ कारोबार न करें। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'हम ईरान समर्थित इराकी आतंकवादी मिलिशिया को अमेरिकी नागरिकों या हितों को खतरे में डालने की अनुमति नहीं देंगे। इन समूहों की हिंसा को बढ़ावा देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।'
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जंग का असर: जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी, एयर कनाडा 5 महीने तक जेएफके एयरपोर्ट के लिए उड़ानें बंद रखेगी
एयर कनाडा एयरलाइंस ने ईरान युद्ध के चलते जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण न्यूयॉर्क के जॉन एफ. केनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अपनी उड़ान सेवाएं लगभग पांच महीने के लिए निलंबित करने का फैसला किया है। एयरलाइन ने शुक्रवार को बताया कि टोरंटो और मॉन्ट्रियल से न्यूयॉर्क के लिए उड़ानें 1 जून से बंद हो जाएंगी और 25 अक्टूबर से फिर शुरू की जाएंगी। हालांकि, न्यूयॉर्क क्षेत्र के अन्य दो हवाई अड्डों ला गार्डिया और नेवार्क के लिए सेवाएं जारी रहेंगी।
एयर कनाडा के प्रवक्ता के अनुसार, 'ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जिससे कम मुनाफे वाले रूट्स आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गए हैं। इसी के चलते शेड्यूल में बदलाव किया जा रहा है।' आंकड़ों के मुताबिक, जेट फ्यूल की औसत कीमत बढ़कर 4.32 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो युद्ध से पहले 2.50 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि, शुक्रवार को जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का एलान किया तो तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन और श्रम लागत एयरलाइंस के लिए सबसे बड़े खर्च होते हैं। जेटब्लू और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियां बैगेज फीस बढ़ा रही हैं, जबकि लुफ्थांसा और केएलएम जैसी एयरलाइंस को कुछ रूट्स पर सेवाएं कम करनी पड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट फ्यूल का भंडार करीब छह हफ्तों का ही बचा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है।
एयर कनाडा के प्रवक्ता के अनुसार, 'ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जिससे कम मुनाफे वाले रूट्स आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गए हैं। इसी के चलते शेड्यूल में बदलाव किया जा रहा है।' आंकड़ों के मुताबिक, जेट फ्यूल की औसत कीमत बढ़कर 4.32 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो युद्ध से पहले 2.50 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि, शुक्रवार को जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का एलान किया तो तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन और श्रम लागत एयरलाइंस के लिए सबसे बड़े खर्च होते हैं। जेटब्लू और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियां बैगेज फीस बढ़ा रही हैं, जबकि लुफ्थांसा और केएलएम जैसी एयरलाइंस को कुछ रूट्स पर सेवाएं कम करनी पड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट फ्यूल का भंडार करीब छह हफ्तों का ही बचा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है।
म्यांमार में कैदियों की सजा माफ, पूर्व राष्ट्रपति रिहा
म्यांमार में देश के नव वर्ष के उपलक्ष्य में 4,500 कैदियों को माफी दी गई है। यह माफी शुक्रवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट को भी दी गई। नव-राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग द्वारा घोषित व्यापक कैदी माफी योजना के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया है। सरकारी मीडिया ने कहा, अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस माफी में सैन्य शासन का विरोध करने के आरोप में कैद किए गए लोग भी शामिल हैं अथवा नहीं। पूर्व नेता आंग सान सू की की रिहाई के भी संकेत नहीं हैं। पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट देश की नेता रही सू की के लंबे समय से वफादार रहे हैं और 2018 में राष्ट्रपति चुने गए थे। उन्हें 1 फरवरी, 2021 को गिरफ्तार किया गया, उसी दिन सेना ने सत्ता पर कब्जा कर कर सू की को हिरासत में ले लिया था।
कम हुई सू की सजा
राजधानी नेपीतॉ के एक वरिष्ठ सैन्य अफसर ने बताया कि पूर्व नेता आंग सान सू की को क्षमादान के तहत नजरबंद किया जाएगा। इस बीच, सू की (80) के वकील ने कहा, सू की की सजा में एक-छठे हिस्से की कटौती की गई है।
कम हुई सू की सजा
राजधानी नेपीतॉ के एक वरिष्ठ सैन्य अफसर ने बताया कि पूर्व नेता आंग सान सू की को क्षमादान के तहत नजरबंद किया जाएगा। इस बीच, सू की (80) के वकील ने कहा, सू की की सजा में एक-छठे हिस्से की कटौती की गई है।
नई कूटनीतिक पहल के बीच हवाना में मिले अमेरिका और क्यूबा के अधिकारी
अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में क्यूबा की राजधानी हवाना पहुंचा। यहां उन्होंने क्यूबा सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की। साल 2016 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका का कोई सरकारी विमान हवाना में उतरा है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह की यात्रा के दौरान विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्यूबा के सेवानिवृत्त नेता राउल कास्त्रो के पोते से मुलाकात की। हालांकि, इस दल में विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल नहीं थे। अमेरिका ने क्यूबा के सामने अपनी अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की शर्त रखी है। अमेरिका चाहता है कि क्यूबा राजनीतिक कैदियों को रिहा करे और लोगों का दमन बंद करे। इसके बदले में अमेरिका क्यूबा पर लगी पाबंदियों को कम कर सकता है।
बैठक में अमेरिका ने क्यूबा को 'स्टारलिंक' सैटेलाइट के जरिए मुफ्त और बेहतर इंटरनेट देने का प्रस्ताव भी दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को एक 'विफल देश' बताया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के बाद उनका ध्यान क्यूबा पर हो सकता है। इसके जवाब में क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा कि उनका देश किसी भी सैन्य हमले का सामना करने और अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में क्यूबा की राजधानी हवाना पहुंचा। यहां उन्होंने क्यूबा सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की। साल 2016 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका का कोई सरकारी विमान हवाना में उतरा है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह की यात्रा के दौरान विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्यूबा के सेवानिवृत्त नेता राउल कास्त्रो के पोते से मुलाकात की। हालांकि, इस दल में विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल नहीं थे। अमेरिका ने क्यूबा के सामने अपनी अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की शर्त रखी है। अमेरिका चाहता है कि क्यूबा राजनीतिक कैदियों को रिहा करे और लोगों का दमन बंद करे। इसके बदले में अमेरिका क्यूबा पर लगी पाबंदियों को कम कर सकता है।
बैठक में अमेरिका ने क्यूबा को 'स्टारलिंक' सैटेलाइट के जरिए मुफ्त और बेहतर इंटरनेट देने का प्रस्ताव भी दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को एक 'विफल देश' बताया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के बाद उनका ध्यान क्यूबा पर हो सकता है। इसके जवाब में क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा कि उनका देश किसी भी सैन्य हमले का सामना करने और अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने गगन थापा गुट को आधिकारिक नेपाली कांग्रेस के तौर पर मान्यता दी
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने गगन थापा के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक 'नेपाली कांग्रेस' के रूप में मान्यता दे दी है। कोर्ट के इस फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस सारंगा सुबेदी और नृप ध्वज निरौला की बेंच ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सही माना, जिसमें थापा की केंद्रीय कार्यसमिति को असली बताया गया था।
काठमांडू में 11 से 14 जनवरी तक हुए एक विशेष महाधिवेशन में 49 वर्षीय गगन थापा को पार्टी अध्यक्ष चुना गया था। शेर बहादुर देउबा और कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का ने इस चुनाव को चुनौती दी थी। उन्होंने 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। देउबा गुट का तर्क था कि थापा का नेतृत्व असंवैधानिक और पार्टी के नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने अब इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
हाल ही में हुए आम चुनावों में नेपाली कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। पार्टी को 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में केवल 38 सीटें मिलीं। गगन थापा खुद भी धनुषा-4 सीट से चुनाव हार गए थे। हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 19 मार्च को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन पार्टी की कार्यसमिति ने उसे नामंजूर कर दिया। इस अदालती फैसले के बाद अब गगन थापा ही आधिकारिक तौर पर पार्टी का नेतृत्व करेंगे।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने गगन थापा के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक 'नेपाली कांग्रेस' के रूप में मान्यता दे दी है। कोर्ट के इस फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस सारंगा सुबेदी और नृप ध्वज निरौला की बेंच ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सही माना, जिसमें थापा की केंद्रीय कार्यसमिति को असली बताया गया था।
काठमांडू में 11 से 14 जनवरी तक हुए एक विशेष महाधिवेशन में 49 वर्षीय गगन थापा को पार्टी अध्यक्ष चुना गया था। शेर बहादुर देउबा और कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का ने इस चुनाव को चुनौती दी थी। उन्होंने 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। देउबा गुट का तर्क था कि थापा का नेतृत्व असंवैधानिक और पार्टी के नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने अब इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
हाल ही में हुए आम चुनावों में नेपाली कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। पार्टी को 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में केवल 38 सीटें मिलीं। गगन थापा खुद भी धनुषा-4 सीट से चुनाव हार गए थे। हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 19 मार्च को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन पार्टी की कार्यसमिति ने उसे नामंजूर कर दिया। इस अदालती फैसले के बाद अब गगन थापा ही आधिकारिक तौर पर पार्टी का नेतृत्व करेंगे।
अफगानिस्तान और अरब सागर में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके
आज, अफगानिस्तान और अरब सागर के क्षेत्रों में भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए है। सुबह की शुरुआत अफगानिस्तान में आए दो लगातार झटकों से हुई, जिनमें पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.6 और दूसरे की 4.8 मापी गई। इन दोनों भूकंपों का केंद्र जमीन से लगभग 170 किलोमीटर की गहराई में था। इन झटकों के कारण लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।
इसके कुछ घंटों बाद सुबह 11:30 बजे अरब सागर में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। हालांकि, अब तक इन भूकंपों से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
आज, अफगानिस्तान और अरब सागर के क्षेत्रों में भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए है। सुबह की शुरुआत अफगानिस्तान में आए दो लगातार झटकों से हुई, जिनमें पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.6 और दूसरे की 4.8 मापी गई। इन दोनों भूकंपों का केंद्र जमीन से लगभग 170 किलोमीटर की गहराई में था। इन झटकों के कारण लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।
इसके कुछ घंटों बाद सुबह 11:30 बजे अरब सागर में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। हालांकि, अब तक इन भूकंपों से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच हुआ 6.5 बिलियन USD का युद्धपोत समझौता
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने मेलबर्न में 10 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (6.5 अरब अमेरिकी डॉलर) के रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए 'मोगामी-क्लास' फ्रिगेट्स खरीदेगा। इस सौदे के अनुसार, पहले तीन युद्धपोत जापान में मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज द्वारा बनाए जाएंगे और 2029 तक इनकी डिलीवरी शुरू हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में आठ और युद्धपोत बनाने की योजना बना रहा है। यह ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में युद्धपोतों का सबसे तेज अधिग्रहण है, जो जर्मनी के प्रस्ताव को पछाड़कर जापान ने हासिल किया है।
ये नए जापानी फ्रिगेट्स ऑस्ट्रेलिया के पुराने होते 'ANZAC-क्लास' जहाजों की जगह लेंगे और आधुनिक मिसाइल व ड्रोन हमलों से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। रक्षा मंत्री शिनजीरो कोइजुमी और रिचर्ड मार्लेस ने बताया कि इन जहाजों की सबसे बड़ी विशेषता इनका कम मैनपावर में संचालित होना है। इन्हें मात्र 92 कर्मियों द्वारा चलाया जा सकेगा, जो वर्तमान जहाजों की तुलना में लगभग आधा है। यह समझौता न केवल ऑस्ट्रेलिया की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
ये नए जापानी फ्रिगेट्स ऑस्ट्रेलिया के पुराने होते 'ANZAC-क्लास' जहाजों की जगह लेंगे और आधुनिक मिसाइल व ड्रोन हमलों से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। रक्षा मंत्री शिनजीरो कोइजुमी और रिचर्ड मार्लेस ने बताया कि इन जहाजों की सबसे बड़ी विशेषता इनका कम मैनपावर में संचालित होना है। इन्हें मात्र 92 कर्मियों द्वारा चलाया जा सकेगा, जो वर्तमान जहाजों की तुलना में लगभग आधा है। यह समझौता न केवल ऑस्ट्रेलिया की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।