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कोरोना वायरस: डेल्टा वैरिएंट पर वैक्सीन का कितना असर- कुछ परदा हटा, कुछ नहीं
Sat, 31 Jul 2021 03:34 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 31 Jul 2021 03:34 PM IST
सार
डॉ. वेलेन्स्की ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हम अब तक जितने वैरिएंट को जानते हैं, उनके बीच डेल्टा वैरिएंट सर्वाधिक संक्रामक है। वह मिजिल्स और चेचक के वायरस जितना संक्रामक है।’ सीडीसी के दस्तावेज में यह भी कहा गया था कि ये वैरिएंट कई दूसरी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है...
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कोरोना डेल्टा वैरिएंट
- फोटो : Agency
विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिसके आधार पर कहा जाए कि कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण से अधिक मौतें होती हैं या इसके सामने वैक्सीन बेअसर साबित होते हैं। डब्ल्यूएचओ की अधिकारी डॉ. मारिया वान केरखोवे ने शुक्रवार को कहा कि अभी इस मामले में शोध किया जा रहा है कि क्या डेल्टा वैरिएंट अधिक संक्रामक है।
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लेकिन अमेरिका में हुए एक अध्ययन से चिंताजनक निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके मुताबिक अध्ययन के दौरान ये देखा गया कि डेल्टा वैरिएंट टीका ले चुके और बिना टीका लिए लोगों में समान मात्रा में वायरस पैदा करता है। बताया जाता है कि इसी अध्ययन के आधार पर अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं निवारण केंद्र (सीडीसी) ने टीका ले चुके लोगों को भी मास्क पहने रखने की सलाह दी है। विशेषज्ञों ने कहा है कि टीका ले चुके लोगों के मामले में ये संभावना कम रहती है कि वे संक्रमित होंगे। लेकिन जो लोग संक्रमित हो जाते हैं, उनमें संक्रमण का वही प्रभाव देखने को मिला है, जो बिना टीका लिए लोगों में दिखा।
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सीडीसी के निदेशक डॉ. रोशेल वेलेंस्की ने शुक्रवार को एक बयान में कहा- ‘संक्रमित लोगों में वायरस का हाई लोड यह संकेत देता है कि ऐसे लोगों के जरिए संक्रमण फैलने का काफी खतरा है। दूसरे वैरिएंट से अलग डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित लोग के साथ ये बात है कि वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।’ सीडीसी ने ये अध्ययन मेसाचुसेट्स में जुलाई में संक्रमित हुए 469 लोगों पर किया। उन लोगों के बीच किसी मौत नहीं हुई। उनमें 346 यानी 74 फीसदी लोग ऐसे हैं, दो वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके हैं। उन 346 लोगों के बीच 79 फीसदी में संक्रमित होने के बाद कोविड-19 संबंधी लक्षण उभरे। जांच से पता चला कि वे सभी डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित हुए थे।
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देखा गया कि टीका ले चुके 127 लोगों और बिना टीका लिए 84 लोगों में वायरल लोड बराबर था। वायरल लोड से मालूम होता है कि संबंधित सक्रमित व्यक्ति से किसी दूसरे को संक्रमण लगने का कितना खतरा है। इसके पहले गुरुवार को खबर आई थी कि सीडीसी के आंतरिक दस्तावेज में कहा गया है कि डेल्टा वैरिएंट लगभग उतना ही संक्रामक है, जितना चेचक का वायरस होता है। जबकि इसके पहले कोविड-19 के जितने वैरिएंट सामने आए थे, वे सामान्य जुकाम के वायरस जितना संक्रामक पाए गए थे। पहले यह माना गया था कि कोविड-19 से संक्रमित एक व्यक्ति दो या तीन अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। लेकिन डेल्टा वैरिएंट के मामले में ये संख्या पांच से नौ तक है।
डॉ. वेलेन्स्की ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हम अब तक जितने वैरिएंट को जानते हैं, उनके बीच डेल्टा वैरिएंट सर्वाधिक संक्रामक है। वह मिजिल्स और चेचक के वायरस जितना संक्रामक है।’ सीडीसी के दस्तावेज में यह भी कहा गया था कि ये वैरिएंट कई दूसरी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
वैसे ताजा अध्ययन के बावजूद कई विशेषज्ञों ने कहा है कि अभी ये बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती कि डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित टीका लगवा चुके लोगों से भी उतना ही संक्रमण फैलता है, जितना बिना टीका लगवाए संक्रमित लोगों से। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में संक्रामक रोगों की विशेषज्ञ डॉ. मोनिका गांधी ने सीएनएन से कहा- ‘यह रहस्यमय डेटा है। मैं अभी ये बात पक्के तौर पर नहीं कह सकती कि टीका लगवा चुके लोगों में भी बिना टीका लगवाए लोगों जितने ही संक्रामक क्षमता है।’