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Winter Olympics: विंटर ओलंपिक के कूटनीतिक बायकॉट में अमेरिका को शायद ना मिले जापान का साथ, जानिए क्या है मामला

Thu, 09 Dec 2021 07:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, टोक्यो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, टोक्यो Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 09 Dec 2021 07:23 PM IST
सार

अमेरिका ने चीन में मानव अधिकारों के कथित हनन का आरोप लगाते हुए शीतकालीन ओलंपिक खेलों के कूटनीतिक बहिष्कार की घोषणा की है। ये खेल अगले चार फरवरी से शुरू होंगे। व्हाइट हाउस के फैसले के मुताबिक अमेरिकी खिलाड़ी इन खेलों में भाग लेंगे। लेकिन वहां का कोई कूटनीतिक प्रतिनिधि में इसमें शामिल नहीं होगा।

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Winter Olympics: America may not get Japan support in the diplomatic boycott of Winter Olympics know what is the matter
बीजिंग शीतकालिन ओलंपिक - फोटो : www.olympics.com

विस्तार

बीजिंग में 2022 में होने वाले विंटर ओलंपिक खेलों का कूटनीतिक बहिष्कार करने की अमेरिका की घोषणा के कुछ घंटों के बाद ही न्यूजीलैंड ने भी ऐसा ही एलान कर दिया। संकेत हैं कि जल्द ही ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भी इन खेलों के दौरान अपने कूटनीतिक प्रतिनिधि बीजिंग ना भेजने की घोषणा करें, लेकिन जापानी मीडिया में छपी खबरों में कहा गया है कि अमेरिका के इस फैसले से जापान की फुमियो किशिदा सरकार के सामने असमंजस खड़ा हो गया है।

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अमेरिका ने चीन में मानव अधिकारों के कथित हनन का आरोप लगाते हुए शीतकालीन ओलंपिक खेलों के कूटनीतिक बहिष्कार की घोषणा की है। ये खेल अगले चार फरवरी से शुरू होंगे। व्हाइट हाउस के फैसले के मुताबिक अमेरिकी खिलाड़ी इन खेलों में भाग लेंगे। लेकिन वहां का कोई कूटनीतिक प्रतिनिधि में इसमें शामिल नहीं होगा। इस मामले में दूसरे देशों से अमेरिका को क्या उम्मीद है, इस सवाल पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी वॉशिंगटन में कहा कि हमने अपने फैसले अपने सहयोगी देशों को बता दिए हैं। लेकिन वे क्या फैसला लेंगे, यह हमने उन पर ही छोड़ दिया है।
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लेकिन अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है, ताकि इन खेलों के बारे में ‘साझा रुख’ अपनाया जा सके। जबकि मंगलवार को जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने कहा कि उनके देश ने अभी इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि जापान के लिए मानव अधिकार से जुड़े मुद्दे और चीन के साथ बातचीत दोनों महत्त्वपूर्ण हैं।
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जापान के प्रधानमंत्री किशिदा ने मंगलवार को ही कहा कि जापान इस मामले में ‘राष्ट्रीय हित’ का ख्याल करते हुए फैसला लेगा। विश्लेषकों का कहना है कि किशिदा सरकार के सामने चुनौती जापान के आर्थिक हितों और कंजरवेटिव समूहों से बहिष्कार की उठ रही मांग के बीच संतुलन बनाने की है। वैसे जापान चीन के मानव अधिकार रिकॉर्ड की आलोचना करता रहा है और ताइवान के मामले में भी उसका रुख पहले से ज्यादा आक्रामक हुआ है। लेकिन वह फिलहाल चीन के साथ टकराव बढ़ाना नहीं चाहता।

अमेरिकी थिंक टैंक जर्मन मार्शल फंड में चीन विशेषज्ञ बोनी ग्लेसर ने अखबार जापान टाइम्स से कहा- मुझे नहीं लगता कि जापान बहिष्कार करेगा। अमेरिका के कुछ सहयोगी देश बहिष्कार करने में अमेरिका का साथ देंगे, लेकिन कई ऐसा नहीं भी करेंगे। मीडिया रिपोर्टों में इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत ने अमेरिका से अच्छे रिश्तों के बावजूद बीजिंग विंटर ओलिंपिक के बहिष्कार से इनकार किया है। पिछले दिनों रूस-भारत-चीन (रिक) के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी साझा बयान से भारत का ये रुख साफ हुआ था।


अमेरिकी एलान के बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने एक बयान में कहा कि ओलंपिक खेलों के मौके पर सरकारी अधिकारियों और कूटनीतिकों की मौजूदगी के बारे में निर्णय विशुद्ध रूप से हर सरकार का अपना राजनीतिक फैसला है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक राजनीतिक मामलों में तटस्थता की नीति पर चलती है। समिति ने कहा- अमेरिकी घोषणा से यह साफ हो गया है कि विंटर ओलंपिक में खिलाड़ियों की भागीदारी राजनीति से ऊपर है और हम इसका स्वागत करते हैं।

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