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उत्तर कोरिया: किम जोंग-उन के बाद किम यो-जोंग होंगी उत्तर कोरिया की अगली शासक?

Fri, 19 Jun 2020 08:07 PM IST
अनिल पांडेय बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: अनिल पांडेय Updated Fri, 19 Jun 2020 08:07 PM IST
सार

किम यो-जोंग पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया की रहस्यमयी सत्ता में एक प्रमुख नेता बनकर उभरी हैं। वो उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन की छोटी बहन हैं। किम यो-जोंग अपने भाई-बहनों में अकेली हैं जिन्हें किम जोंग-उन के करीबी और ताकतवर सहयोगी माना जाता है।

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Will Kim Yo-jong be the next North Korean ruler after Kim Jong-un
उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन की बहन किम यो जोंग - फोटो : File

विस्तार

किम यो-जोंग साल 2018 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में तब आईं जब वो दक्षिण कोरिया जाने वाली किम वंश की पहली सदस्य बनीं। शीत ओलंपिक के दौरान वो एक शिष्टमंडल के साथ दक्षिण कोरिया गई थी। दक्षिण और उत्तर कोरिया ने एक संयुक्त टीम के रूप में शीत ओलंपिक में हिस्सा लिया था।

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साल 2018 में उन्हें अपने भाई और उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन के साथ मिलकर कूटनीतिक रणनीतियां तय करते भी देखा गया। उस साल किम जोंग-उन ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इन मुलाकातों ने किम यो-जोंग के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का रास्ता खोला था।
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इस साल अप्रैल में किम यो-जोंग एक बार फिर अपने भाई की करीबी सहयोगी और वरिष्ठ राजनीतिक भूमिका में नजर आईं। अप्रैल में किम जोंग-उन अचानक ही कुछ हफ़्तों के लिए सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। इस दौरान उनके 'ग़ायब' होने की अटकलें लगाई जाने लगीं क्योंकि वो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आ रहे थे।
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इन सबकी वजह से किम जोंग-उन की मृत्यु की आशंका भी जताई जाने लगी और किम यो-जोंग को उत्तर कोरिया की नई शासक और किम जोंग-उन के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा।

किम यो-जोंग का राजनीतिक कद सबसे पहले अक्टूबर, 2017 में बढ़ा जब वो ताकतवर पोलित ब्यूरो की सदस्य बनीं। इससे पहले वो उस महकमे की उप निदेशक थीं जो किम जोंग-उन की सार्वजनिक छवि और नीतियों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभालता है।

किम यो-जोंग पर अमेरिका ने उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में प्रतिबंध लगा रखा है। इसका मतलब ये है कि कोई भी अमरीकी नागरिक उनके साथ पैसों का लेन-देन नहीं कर सकता।

किम यो-जोंग कितनी ताकतवर हैं?
उत्तर कोरिया में सत्ता और ताकत का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। इसलिए ये समझना भी मुश्किल है कि किम-जोंग का राजनीतिक नेटवर्क कितना मजबूत है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी शादी किम जोंग-उन के राइट हैंड और पार्टी के सेक्रेटरी चॉय रयोंग-हे के बेटे से हुई है। अगर ये बात सच है तो इससे किम यो-जोंग और ज्यादा ताकतवर हैं।

एनके न्यूज के ऑलिवर हॉटम ने बीबीसी को बताया कि किम यो-जोंग तकरीबन 30 साल की एक महिला हैं और किम जोंग-उन की करीबी सहयोगी होने की वजह से काफ़ी प्रभावी हैं। एनके न्यूज के अनुसार, हाल में दक्षिण कोरिया को दिए जाने वाले कड़े जवाब के पीछे किम यो-जोंग ही हैं।

कुछ दिनों पहले ही उन्होंने उत्तर और दक्षिण कोरिया सीमा पर सैन्यरहति जोन (डिमिलट्राइज्ड) पर सेना भेजने की धमकी दी थी। इससे पहले उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया था कि दक्षिण कोरिया सीमा पार से आने वाले सत्ताविरोधी कार्यकर्ताओं और प्रचार सामग्री को रोकने में असफल रहा है।

किम यो-जोंग ने सीमा के पास बने कएसोंग में बने उत्तर और दक्षिण कोरिया के साझा दफ़्तर को 'नष्ट करने' की धमकी भी दी थी और मंगलवार को ऐसी ख़बरें आई कि उत्तर कोरिया ने सचमुच ये दफ़्तर उड़ा दिया है। 16 जून को कएसोंग में एक तेज धमाका सुनाई पड़ा और कार्यालय की इमारत से धुंआ उठता दिखाई दिया। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने दफ़्तर नष्ट किए जाने की पुष्टि की है। दक्षिण कोरिया ने इस इमारत की मरम्मत के लिए लगभग आठ मिलियन डॉलर दिए थे।

उत्तर कोरिया ने मार्च 2019 में इस दफ्तर से खुद को अलग कर लिया था। 2018 में बातचीत के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए यह कार्यालय बनाया था।

किम परिवार का उत्तराधिकारी कौन होगा?
अगर किम जोंग-उन के उत्तराधिकारी को चुनना हो तो इसमें पारिवारिक रिश्तों की महत्वूर्ण भूमिका होगी। उत्तर कोरिया के प्रॉपगैंडा और राजनीतिक सिद्धातों की शुरुआत देश के संस्थापक किम इल-सुंग ने की थी।

माना जाता है कि किम जोंग-उन के बच्चे तो हैं लेकिन वो अभी काफ़ी छोटे हैं। ऐसे में चूंकि किम यो-जोंग परिवार की सदस्य हैं इसलिए, उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया मानती है कि किम जोंग-उन के बाद सत्ता की बागडोर उनके ही हाथों में होगी। हालांकि अगर किसी परिस्थिति में ऐसा हो कि उन्हें उत्तराधिकारी न चुना जाए तो नए नेता के लिए वो कड़ी प्रतिद्वंद्विता और स्पर्धा पेश करेंगी।

सोल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी के फ़्योडोर टर्टिस्की कहते हैं, "अगर सत्ता परिवार के किसी और सदस्य के हाथ में नहीं आती है तो किम यो-जोंग के लिए चीजें काफ़ी आसान होंगी। या तो वो उत्तर कोरिया की सर्वोच्च नेता बनेंगी या शायद अपनी सारी ताकत खो देंगी।"

सत्ताधारी परिवार में किम यो-जोंग की क्या जगह है?
किम यो-जोंग किम जोंग-इल की सबसे छोटी बेटी हैं। उनकी, किम जोंग-उन और किम जोंग-चोल एक ही मां की संतानें हैं। किम जोंग-चोल, किम जोंग-उन और किम यो-जोंग के भाई हैं और राजनीति में उन्हें बहुत वरिष्ठ नहीं माना जाता। 1987 में जन्मी किम यो-जोंग अपने भाई किम जोंग-उन से उम्र में चार साल छोटी हैं। दोनों भाई-बहन ने बर्न (स्विटजरलैंड) में साथ रहकर पढ़ाई की है।

स्विटजरलैंड में उनके स्कूल के अधिकारी बताते हैं कि किम यो-जोंग हमेशा अपने गार्ड और केयरटेकर्स से घिरी रहती हैं। एक बार उन्हें हल्का सा जुकाम क्या हुआ उनके केयरटेकर उन्हें स्कूल से सीधे अस्पताल ले गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ किम यो-जोंग को जैसे एक सुरक्षा कवच के भीतर बड़ा किया गया है और किम परिवार के ज्यादातर सदस्यों की उनसे बहुत ज्यादा बातचीत नहीं है।

वो करती क्या हैं?
साल 2014 से किम यो-जोंग का प्रमुख काम अपने भाई किम जोंग-उन की छवि को बेहतर बनाना है। साल 2017 में उन्हें पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया गया जिससे उनका राजनीतिक कद और ऊंचा हो गया। हालांकि इसके साथ-साथ उन्होंने अपने भाई की नीतियों का प्रचार-प्रसार जारी रखा।

कहा जाता है कि किम जोंग-उन जब भी सार्वजनिक जगहों पर दिखते हैं, उसका पूरा इंतजाम किम यो-जोंग ही करती हैं। इसके अलावा वो अपने भाई की राजनीतिक सलाहकार भी हैं।

माना जाता है कि साल 2019 में जब अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया की हनोई शिखरवार्ता असफल होने के बाद पोलितब्यूरो में कुछ हद तक उनकी भूमिका कमजोर कर दी गई थी। हालांकि साल 2020 में वो वापस अपनी पुरानी भूमिका में लौट आईं।

साल 2014 से पहले वो कभी-कभी ही लाइमलाइट में नजर आती थीं। जैसे, साल 2011 में उन्हें अपने पिता के राजकीय अंतिम संस्कार में देखा गया था और 2014 के चुनाव में अपने भाई के साथ। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया की कुछ तस्वीरों में वो किम जोंग-उन के साथ भी नजर आती हैं।


साल 2008 में जब किम जोंग-उन की तबीयत बिगड़ी थी तब भी किम यो-जोंग को उनका उत्तराधिकारी बनाने की अटकलें थीं। ।

जब भी किम जोंग-उन की सेहत को लेकर अटकलों का दौर शुरू होता है, उनके उत्तराधिकारी बनने की अटकलें भी शुरू हो जाती हैं। 2020 से पहले 2014 में भी किम यो-जोंग के हाथों में सत्ता की बागडोर देने की बातें सामने आई थीं जब किम जोंग-उन अचानक सार्वजनिक जीवन से 'ग़ायब' हो गए थे।

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