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'न 20%, न 30%': बातचीत से क्यों खुश नहीं थे ट्रंप, अमेरिका-ईरान के बीच विवाद क्या है, आखिर क्यों नहीं टली जंग?

Sat, 28 Feb 2026 02:39 PM IST
Rahul Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव। Published by: Rahul Kumar Updated Sat, 28 Feb 2026 02:39 PM IST
सार

US. and Israel Strikes Iran: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी थी। तीसरा दौर जिनेवा में हुआ। चौथे दौर की बात सोमवार को वियना में होनी थी। लेकिन उससे पहले ही हमला हो गया। ऐसा क्यों हुआ? इसकी वजह ट्रंप के अपने बयानों में मिलती है...

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Why Talks Failed in West Asia? Trump Unhappy With Iran, Strike Launched Before Monday Negotiations
इस्राइल-ईरान संघर्ष। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से एक ही चीज चाहते हैं- यूरेनियम संवर्धन यानी एनरिचमेंट बंद हो। उन्होंने साफ कहा था, "मैं कहता हूं कि कोई संवर्धन नहीं। न 20%, न 30%"। ईरान इसके लिए तैयार नहीं था। यही दोनों देशों के बीच बातचीत नाकाम हुई और लंबे समय से पश्चिम एशिया में जो घटित होने की अटकलें थीं, वो आखिरकार शनिवार को हो गया। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के ठिकानों पर संयुक्त रूप से हमला कर दिया। आइए जानते हैं कि पिछले कुछ दिनों में आखिर हुआ क्या...
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1. अमेरिका-ईरान के बीच विवाद क्या है?
बात परमाणु कार्यक्रम की है। अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान चुपके-चुपके परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। ईरान कहता है- यह सब शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, हम हथियार नहीं बना रहे। दुनिया में जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, उनमें से ईरान अकेला है जिसने यूरेनियम को हथियार बनाने के करीब तक जाकर संवर्धित किया है। यही बात अमेरिका को खलती है।
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2. ताजा बातचीत कहां तक पहुंची थी?
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हाल ही में तीसरे दौर की बातचीत हुई थी। ओमान मध्यस्थ की भूमिका में था। बातचीत में ईरान का कहना था कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा उसका अधिकार है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने कहा था कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का जखीरा जमा न करने पर सहमति दी है। उन्होंने इसे बड़ी कामयाबी बताया था और कहा था, "शांति समझौता हमारी पहुंच में है... बस कूटनीति को काम करने दो।" उन्होंने यह भी कहा था कि सभी मुद्दे कुछ महीनों में हल हो सकते हैं।'' हालांकि, अमेरिकी मांग इससे भी आगे थी। वो 400 किलो संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर भेजने की बात कर रहा था। चौथे दौर की बातचीत सोमवार को ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में होनी थी। लेकिन उससे पहले ही हमला हो गया।
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3. ट्रंप किस बात से नाराज थे?
ईरान से जारी अप्रत्यक्ष बातचीत पर ट्रंप ने खुद कहा था, "मैं खुश नहीं हूं। वो हमें वो नहीं दे रहे, जो हमें चाहिए। मैं कहता हूं कि कोई संवर्धन नहीं। न 20%, न 30%।" इससे पहले 19 फरवरी को ट्रंप ने एयर फोर्स वन में मीडिया से कहा था कि ईरान के पास ज्यादा से ज्यादा 10-15 दिन हैं। हमें एक ठोस डील करनी होगी। वरना बुरी चीजें होंगी।

4. जंग की तैयारी कब से थी?
काफी पहले से। अमेरिका ने यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड जंगी जहाज भूमध्य सागर की तरफ भेजा था। एक और युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से मध्य पूर्व में तैनात था। यानी एक साथ दो विमानवाहक पोत। इसके अलावा विध्वंसक जहाज और लड़ाकू विमानों की तैनाती भी बढ़ाई गई थी। इससे पहले, पिछले जून में अमेरिका ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला कर चुका था। उस अभियान का नाम था- ऑपरेशन मिडनाइट हैमर।

5. ईरान का जवाब क्या हो सकता है?
ईरान के पास कुछ विकल्प हैं। 
पहला- होर्मुज जलडमरूमध्य। दुनिया का 20-25% तेल और 20% LNG यहीं से गुजरती है। जिनेवा वार्ता के दौरान ईरान ने कुछ घंटों के लिए इसे बंद कर लाइव फायर ड्रिल की थी। ऐसा 1980 के दशक के बाद पहली बार हुआ था।
दूसरा- बैलिस्टिक मिसाइलें। ईरान की मध्यम दूरी की मिसाइलें 1,200 मील से अधिक दूर तक मार कर सकती हैं। इसमें इजराइल, खाड़ी देश और पश्चिमी तुर्की तक के अमेरिकी ठिकाने आ जाते हैं।
तीसरा- समुद्री बारूदी सुरंगें। ईरान ने इन्हें तेजी से बिछाने का अभ्यास भी किया है। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में ईरान ने यही किया था और शिपिंग लेन को बाधित किया था।
लेकिन होर्मुज बंद करना ईरान के लिए भी नुकसानदेह होगा। वो खुद तेल निर्यात पर निर्भर है और उसके मुख्य खरीदार चीन जैसे एशियाई देश हैं।



6. पड़ोसी देश क्या चाहते हैं?
इस्राइल को छोड़कर कोई भी देश इस जंग में सीधे शामिल नहीं होना चाहता। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने जनवरी में साफ कह दिया था कि वो अमेरिकी हमले के लिए अपना हवाई क्षेत्र नहीं देंगे। बहरीन और कतर में अमेरिकी अड्डे हैं, लेकिन इन देशों को भी डर है कि ईरान उन्हें निशाना बना सकता है। हालांकि अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन ने चेतावनी दी थी कि ईरान पर हमला जोखिम भरा हो सकता है और हम लंबे संघर्ष में फंस सकते हैं। ट्रंप ने इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए कहा कि यह जंग आसानी से जीती जा सकती है।

7. ईरान के अंदर क्या चल रहा है?
ईरान में इन दिनों नौरोज यानी फारसी नव वर्ष की तैयारी का वक्त है। आमतौर पर इस समय बाजारों में खूब रौनक होती है। लेकिन इस बार बाजार सुनसान हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों की मार से महंगाई 62% से ऊपर पहुंच चुकी है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक नहीं आ रहे। निवेशक बड़े फैसले टाल रहे हैं क्योंकि हर कदम जोखिम भरा लग रहा है। शनिवार को जैसे ही हवाई हमले हुए, ईरान में अफरा-तफरी मच गई। पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं।


8. एनरिच्ड यूरेनियम क्या है?
एनरिच्ड यूरेनियम का उपयोग बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है, लेकिन यदि इसे उच्च स्तर तक समृद्ध किया जाए तो इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी हो सकता है। अमेरिका, ईरान से यूरेनियम संवर्धन को लेकर ठोस और निर्णायक गारंटी की मांग कर रहा है, साथ ही ऐसे निरीक्षणों की भी मांग कर रहा है, जिनसे अमेरिका को यह भरोसा हो सके कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है।

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