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Hindi News ›   World ›   Why is this sympathy of the European Union for Myanmar military rule Know All About It In Hindi

Myanmar vs EU: म्यांमार के सैनिक शासन के लिए क्यों जारी है यूरोपियन यूनियन की ये हमदर्दी? जानें पूरा मामला

Sun, 02 Oct 2022 05:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, यंगून
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, यंगून Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 02 Oct 2022 05:46 PM IST
सार

बीस महीने पहले हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से म्यांमार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। 14 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इन आंकड़ों का जिक्र बीते जून में संयुक्त राष्ट्र के विशेष मानव अधिकार रैपोटियर टॉम एंड्र्यूज ने किया था। 

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Why is this sympathy of the European Union for Myanmar military rule Know All About It In Hindi
Myanmar protest - फोटो : PTI

विस्तार

खबर है कि यूरोपियन यूनियन (ईयू) म्यांमार के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। लेकिन अभी भी वह म्यांमार को ईयू क्षेत्र में मिली विशेष व्यापार सुविधाओं को रद्द करने के मूड में नहीं है। म्यांमार में सैनिक शासन के खिलाफ अभियान चला रहे संगठनों ने इसे ईयू का दोहरा रुख बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ईयू मानव अधिकार और लोकतंत्र की अपनी चिंता के ऊपर अपने व्यापार फायदों को तरजीह दे रहा है। इन संगठनों के साथ-साथ यूरोप की कई ट्रेड यूनियनों ने भी ईयू से मांग की है कि वह म्यांमार से पूरा संबंध तोड़ ले।

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विशेष सुविधा के तहत म्यांमार से ईयू के लिए निर्यात होने वाली कई वस्तुओं पर कोई शुल्क नहीं लगता है। इस सुविधा को ईबीए नाम से जाना जाता है। आलोचकों ने कहा है कि जब तक म्यांमार को इस सुविधा से वंचित नहीं किया जाता, सैनिक शासन के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बना रहेगा। ईबीए को निलंबित करने की मांग यूरोपीय संसद की तरफ से भी की जा चुकी है। एक फरवरी 2021 को म्यांमार की सेना ने निर्वाचित प्रतिनिधियों का तख्ता पलट कर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। 
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उसके बाद उसी वर्ष 11 फरवरी को यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर इस बात की पड़ताल करने की मांग की कि क्या म्यांमार को ईबीए सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। अक्तूबर 2021 में यूरोपीय संसद ने फिर एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि तख्ता पलट से लोकतंत्र की दिशा में हुई प्रगति उलटी दिशा में चली गई है, जिससे ईबीए में तय शर्तों का उल्लंघन होता है। इस वर्ष सितंबर में एक प्रस्ताव में यूरोपीय संसद ने यूरोपीय आयोग से कहा कि म्यांमार की ईबीए सुविधाओं के बारे में वह तुरंत फैसला ले। 
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ईयू ने म्यांमार को यह व्यापार सुविधा 2013 में दी थी। 2016 में अमेरिका ने भी म्यांमार के लिए वे व्यापार सुविधाएं बहाल कर दीं, जो पूर्व सैनिक शासन के दौरान मानव अधिकारों के हुए हनन के कारण निलंबित कर दी गई थीं।

नई सुविधाएं मिलने के बाद म्यांमार से पश्चिमी देशों के लिए कपड़े के निर्यात में पांच गुना बढ़ोतरी हुई। 2019 में इस निर्यात का मूल्य 5.02 बिलियन डॉलर था। यह म्यांमार के कुल निर्यात का एक तिहाई हिस्सा था। इसलिए ये माना जा रहा है कि अगर फिर से यह सुविधा रोकी गई, तो उससे सैनिक शासन के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत बंद हो जाएगा। इसके बाद उसके लिए राज करना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। 

बीस महीने पहले हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से म्यांमार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। 14 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इन आंकड़ों का जिक्र बीते जून में संयुक्त राष्ट्र के विशेष मानव अधिकार रैपोटियर टॉम एंड्र्यूज ने किया था। 


इंडस्ट्रियल यूरोपियन ट्रेड यूनियन के महासचिव लुक ट्रायएंगल ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से बातचीत में कहा कि म्यांमार में ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 301 ट्रेड यूनियन नेता जेलों में हैँ। साफ है कि म्यांमार सरकार अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की संधियों का पालन नहीं कर रही है। ऐसे में यूरोपीय देश उसे विशेष व्यापार सुविधा देते रहें, इसका कोई तर्क नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि असल में ईबीए सैनिक शासन के लिए आमदनी और विदेशी मुद्रा का जरिया बना हुआ है, जिससे (लोकतंत्र और श्रम अधिकारों को) वास्तविक नुकसान हो रहा है।

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