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पुलवामा हमला: आखिर चीन का चहेता क्यों बना हुआ है आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर
Fri, 15 Feb 2019 02:26 PM IST
अजय सिंह
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अजय सिंह
Updated Fri, 15 Feb 2019 02:26 PM IST
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मसूद अजहर
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जम्मू-कश्मीर में अब तक तक के सबसे घातक आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए और 5 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने वीडियो जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली है। संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन ने जैश-ए-मोहम्मद को साल 2002 में आतंकवादी समूह घोषित किया है और पाकिस्तानी सरकार के भीतर इसके संबंध होने का आरोप लगाया है। लेकिन जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकियों की सूची में नही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन ने भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश के सरगना मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों पर बार-बार रोड़ा अटकाया है। चीन वीटो पावर का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को बचाता रहा है। पुलवामा हमले के बाद भारत की इस कोशिश पर एक बार फिर चीन ने अपना वही पुराना रंग दिखाया है।
चीन ने शुक्रवार को पुलवामा आतंकवादी हमले की निंदा की है, लेकिन उसने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराये जाने की भारत की अपील का समर्थन करने से एक बार फिर इनकार कर दिया।
पुलवामा जिले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर गुरुवार को एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी अपनी एसयूवी कार को सीआरपीएफ की बस के काफिले में टक्कर मार दी। सीआरपीएफ के 78 वाहनों का काफिला 2500 जवानों को लेकर जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। हमलावर ने जिस बस में टक्कर मारी वह 54वीं बटालियन की थी जिसमें 44 जवान सवार थे।
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भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक बार फिर अपील की है कि आतंकी मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों की सूची को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक सूची में शामिल किया जाए और पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रस्ताव का समर्थन करें।
हालांकि चीन ने पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में डालने की भारत की अपील का समर्थन करने से फिर इनकार कर दिया है।
2016 में चीन ने लगाया वीटो
भारत सरकार ने दिसंबर 2016 में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल कराने की कोशिश की थी। लेकिन उस समय चीन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो करने का एलान कर किया।
चीन ने अपने निर्णय को लेकर यह तर्क दिया था इस मुद्दे पर सीधे तौर से जुड़े भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के बीच आम राय नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर भारत को सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन हासिल है। लेकिन सुरक्षा परिषद के नियम के तहत किसी फैसले के लिए सभी स्थाई सदस्यों की रजामंदी जरूरी होती है।
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चीन ने शुक्रवार को पुलवामा आतंकवादी हमले की निंदा की है, लेकिन उसने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराये जाने की भारत की अपील का समर्थन करने से एक बार फिर इनकार कर दिया।
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पुलवामा जिले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर गुरुवार को एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी अपनी एसयूवी कार को सीआरपीएफ की बस के काफिले में टक्कर मार दी। सीआरपीएफ के 78 वाहनों का काफिला 2500 जवानों को लेकर जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। हमलावर ने जिस बस में टक्कर मारी वह 54वीं बटालियन की थी जिसमें 44 जवान सवार थे।
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भारत ने मसूद अजहर को लेकर दोहराई मांग
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत अपने बहादुर जवानों पर हुए इस कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इस घृणित कार्य को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया जिसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों ने आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया है। इस आतंकी गुट का सरगना अंतरराष्ट्रीय आंतकवादी मसूद अजहर है जिसे पाकिस्तान सरकार की तरफ से संचालन और विस्तार कर भारत और अन्य जगहों पर हमले की खुली छूट मिली हुई है।भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक बार फिर अपील की है कि आतंकी मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों की सूची को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक सूची में शामिल किया जाए और पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रस्ताव का समर्थन करें।
हालांकि चीन ने पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में डालने की भारत की अपील का समर्थन करने से फिर इनकार कर दिया है।
2016 में चीन ने लगाया वीटो
भारत सरकार ने दिसंबर 2016 में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल कराने की कोशिश की थी। लेकिन उस समय चीन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो करने का एलान कर किया।
चीन ने अपने निर्णय को लेकर यह तर्क दिया था इस मुद्दे पर सीधे तौर से जुड़े भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के बीच आम राय नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर भारत को सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन हासिल है। लेकिन सुरक्षा परिषद के नियम के तहत किसी फैसले के लिए सभी स्थाई सदस्यों की रजामंदी जरूरी होती है।
चीन पहले भी रोड़ा अटका चुका
इससे पहले चीन हिज्बुल-मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन, लश्कर के आतंकी अब्दुल रहमान मक्की और अजम चीमा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव पर रोड़ा अटका चुका है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बावजूद हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी को पाकिस्तान में मिलने वाले फंड के सवाल पर भी चीन उनके समर्थन में खड़ा हो जाता है।मसूद अजहर पर चीन ने फिर दोहराया पुराना राग
india china
- फोटो : PTI
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पत्रकारों से कहा, "चीन आत्मघाती हमले की खबरों से वाकिफ है। हम इस हमले से गहरे सदमे में हैं और मृतकों तथा घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करते हैं।"
गेंग ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के किसी भी रूप की कड़ी निंदा और पुरजोर विरोध करते हैं। उम्मीद है कि संबंधित क्षेत्रीय देश आतंकवाद से निपटने के लिये एक दूसरे का सहयोग करेंगे और इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिये मिलकर काम करेंगे।"
अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, जहां तक सूचीबद्ध करने की बात हैं, मैं बस यही बता सकता हूं कि सुरक्षा परिषद की 1267 समिति के आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया और नियम स्पष्ट हैं।"
अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों से भारत की अपील के बारे में उन्होंने कहा, "जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की आतंकवाद प्रतिबंध सूची में रखा गया है। चीन संबंधित प्रतिबंधों के मुद्दे से रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से निबटना जारी रखेगा।"
पाकिस्तान के करीबी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति प्राप्त चीन अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने की भारत की कोशिशों को कई बार विफल कर चुका है। उसका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं है।
गेंग ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के किसी भी रूप की कड़ी निंदा और पुरजोर विरोध करते हैं। उम्मीद है कि संबंधित क्षेत्रीय देश आतंकवाद से निपटने के लिये एक दूसरे का सहयोग करेंगे और इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिये मिलकर काम करेंगे।"
अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, जहां तक सूचीबद्ध करने की बात हैं, मैं बस यही बता सकता हूं कि सुरक्षा परिषद की 1267 समिति के आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया और नियम स्पष्ट हैं।"
अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों से भारत की अपील के बारे में उन्होंने कहा, "जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की आतंकवाद प्रतिबंध सूची में रखा गया है। चीन संबंधित प्रतिबंधों के मुद्दे से रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से निबटना जारी रखेगा।"
पाकिस्तान के करीबी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति प्राप्त चीन अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने की भारत की कोशिशों को कई बार विफल कर चुका है। उसका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं है।
तालिबान का करीबी है मसूद अजहर
जिहाद लाने वाला मौलाना
मौलाना मसूद अजहर के तालिबान से नजदीकी संबंध रहे हैं। मसूद ने यह स्वीकार किया है कि उसने अफगानिस्तान में ओसामा बिन लादेन से मुलाकात की है और सोमालिया में अल कायदा की भर्ती में मदद करने वहां गया था। इतना ही नहीं मसूद अजहर तालीबान के मुखिया मुल्ला उमर के प्रति भी अपनी वफादारी जता चुका है।
लेकिन फिर भी आतंकी वारदातों से भारता का सीना छलनी करने वाले मसूद अजहर, हाफिज सईद , सैयद सलाहुद्दीन, जकीउर रहमान लखवी जैसे आतंकवादियों पर उसकी दलील बेमानी लगती है।
इन आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव पर चीन कहता है कि चाहे ये लोग आतंकी हो या नहीं, लेकिन इनके खिलाफ ठोस तथ्य और सबूत होने चाहिए। चीन कहता है कि अगर ठोस सबूत हुए तो पाकिस्तान भी इसे झुठला नहीं सकता।
लेकिन मसूद अजहरको वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए भारत द्वारा पर्याप्त सबूत पेश किए जाने के बावजूद चीन हमेशा भारत की राह में रोड़ा अटकाता रहा है।
कांधार विमान हाईजैक मसूद के लिए हुआ
साल 1999 में तालिबानी आतंकवादियों ने मसदू अजहर को भारत की गिरफ्तर से आजाद कराने के लिए कांधार विमान हाईजैक जैसी बड़ी घटना को अंजाम दिया था। इससे ये पता चलता है कि मसूद अजहर को दुनिया भर में आतंक फैलाने वाले आकाओं का संरक्षण हासिल है।चीन क्यों करता है मसूद का समर्थन
चीन और पाकिस्तान की नजदीकियां जगजाहिर हैं। माना जाता है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती ताकत को देखते हुए चीन पाकिस्तान का सहयोग करता है। हालांकि चीन सार्वजनिक तौर पर कहता है कि वह वैश्विक आतंकवाद की लड़ाई में दुनिया के सभी देशों के साथ खड़ा है।लेकिन फिर भी आतंकी वारदातों से भारता का सीना छलनी करने वाले मसूद अजहर, हाफिज सईद , सैयद सलाहुद्दीन, जकीउर रहमान लखवी जैसे आतंकवादियों पर उसकी दलील बेमानी लगती है।
इन आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव पर चीन कहता है कि चाहे ये लोग आतंकी हो या नहीं, लेकिन इनके खिलाफ ठोस तथ्य और सबूत होने चाहिए। चीन कहता है कि अगर ठोस सबूत हुए तो पाकिस्तान भी इसे झुठला नहीं सकता।
लेकिन मसूद अजहरको वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए भारत द्वारा पर्याप्त सबूत पेश किए जाने के बावजूद चीन हमेशा भारत की राह में रोड़ा अटकाता रहा है।