Sweida Row: सीरिया पर क्यों बम बरसा रहा इस्राइल, स्वैदा में कैसे हैं हालात? संघर्ष विराम के बाद भी शांति नहीं
इस्राइल और हमास के बीच नेतन्याहू ने अब सीरिया की राजधानी दमिश्क समेत उसके तीन प्रांतों को निशाना बनाया है। 13 जुलाई को सीरिया के स्वैदा हुई एक घटना के बाद इस्राइल सीधे तौर पर वहां जारी संघर्ष में कूद गया। वह वहां की नई कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ हवाई हमलों को अंजाम दे रहा है।
विस्तार
हमास के साथ दो साल से जारी जंग के बीच इस्राइल ने अब सीरिया पर हमले तेज कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि 13 जुलाई को सीरिया के स्वैदा में हुई एक घटना के बाद इस्राइल ने खुले तौर पर सीरिया के खिलाफ अपने हमलों को अंजाम दिया है। इन हमलों का मकसद द्रूज की सुरक्षा बताई गई। बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि वे आगे भी ऐसा करना जारी रखेंगे।
ऐसा क्या हुआ कि इस्राइल को करनी पड़ी संघर्ष में एंट्री
दरअसल, सीरिया में लंबे समय से गृहयुद्ध जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब एक द्रुज सब्जी विक्रेता को एक बेदुइन कबायलियों ने अपहरण कर लूट लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच एक के बाद एक अपहरण और जवाबी हमले शुरू हो गए। इसके बाद हिंसा और भड़क उठी और सीरियाई सरकार के लड़ाके भी द्रुजों की हत्या में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को देखते हुए इस्राइल ने 15 जुलाई को पहली बार सीरिया के सुवैदा में हमले बोले और कट्टरपंथी लड़ाकों को भागने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद इस्राइल ने 16 जुलाई को हमलों को और तेज किया और सीरिया की राजधानी दमिश्क में सैन्य मुख्यालय और सीरिया रक्षा मंत्रालय पर बम बरसा दिए।
द्रुज लड़ाकों और सीरियाई सेना के बीच संघर्ष विराम पहले हुआ फिर टूटा
सीरिया पर इस्राइल के हमलों के बाद मंगलवार को द्रुज समुदाय और सीरियाई लड़ाकों के बीच एक सीजफायर (युद्धविराम) लागू हुआ। सीरिया के रक्षा मंत्री मुरहाफ अबू कासरा ने मंगलवार को घोषणा की कि स्वैदा शहर में सरकार और स्थानीय गुटों के बीच समझौते के बाद सीरिया की सेना युद्धविराम करेगी। हालांकि यह संघर्षविराम 24 घंटे भी नहीं टिक सका और बुधवार को एक बार फिर सरकारी बलों की ड्रूज सदस्यों के साथ झड़प हुई। इन झड़पों में कई लोग मारे गए। इसके बाद इस्राइल ने एक बार फिर सीरिया के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और सीरिया की राजधानी दमिश्क में सैन्य मुख्यालय और सीरिया रक्षा मंत्रालय पर बम बरसा दिए। हालांकि इससे बाद एक बार फिर सीरियाई बलों और ड्रूज लड़ाकों के बीच संघर्षविराम हो गया है। सीरियाई बलों ने क्षेत्र से भारी सैन्य उपकरण हटाने शुरू कर दिए हैं, जबकि ड्रूज लड़ाके सशस्त्र प्रतिरोध रोकने पर सहमत हो गए हैं, जिससे सीरियाई सैनिकों को स्वैदा पर नियंत्रण प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
द्रूज और सीरियाई बलों के बीच संघर्षविराम के बाद भी नहीं रुक रहा इस्राइल
सीरियाई बलों और ड्रूज लड़ाकों के बीच एक बार फिर भले ही संघर्षविराम हो गया हो और सीरियाई बलों ने क्षेत्र से भारी सैन्य उपकरण हटाने शुरु कर दिए हैं, बावजूद इसके इस्राइल ने अपने हमले नहीं रोके हैं। सीरियाई मीडिया के मुताबिक, गुरुवार को दोबारा इस्राइल ने स्वैदा के निकट हमले किए। ये हमले द्रूज लड़ाकों के साथ झड़पों के बाद सीरियाई सरकारी बलों के वापस लौटने के बाद पहला हमला था। सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी सना ने बताया कि इस्राइली सेना के विमानों ने स्वेदा शहर के बाहरी इलाके में हमला किया। इस्राइली अधिकारियों का कहना है कि वे दक्षिणी सीरिया में बढ़ती हिंसा के बीच सीरिया के द्रूज अल्पसंख्यकों की रक्षा करने के लिए वे इन हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
इस्राइल आगे भी जारी रखेगा सैन्य कार्रवाई
वहीं, इन हमलों के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिर से सीरिया की नई अंतरिम सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस्राइली सेना ने सीरिया में बड़ी सैन्य कार्रवाई की है और यह कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। अपने कदम को लेकर उन्होंने दो कारण भी गिनाए। पहला- दमिश्क (सीरिया की राजधानी) के दक्षिणी इलाके को सैन्य मुक्त बनाए रखना, जो कि गोलन हाइट्स से लेकर द्रुज पहाड़ियों तक फैला हुआ है। दूसरा- सीरिया में बसे द्रुज समुदाय की रक्षा करना।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि सीरियाई सरकार ने इन दोनों शर्तों का उल्लंघन किया। उन्होंने दावा किया कि दमिश्क से दक्षिण की ओर सेना भेजी गई, जहां जाने की इजाजत नहीं थी। वहां द्रुज समुदाय पर हमला किया गया और नरसंहार शुरू हुआ। नेतन्याहू के मुताबिक, 'हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते थे। इसलिए मैंने इस्राइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) को जोरदार कार्रवाई के आदेश दिए।'
स्वैदा में कैसे हैं मौजूदा हालात
इस सप्ताह की शुरुआत से स्वैदा में शुरू हुआ द्रुज सशस्त्र समूहों और सीरियाई सरकारी बलों के बीच संघर्ष समझौते के बाद फिलहाल शांत हुआ है, हालांकि, छिटपुट गोलीबारी जारी है, जिससे युद्धविराम के बने रहने पर संदेह है। वहीं, पिछले हमलों ने वहां की स्थिति को बदलकर रख दिया है। बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों की मौंते भी हुई हैं। ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने रविवार से स्वैदा प्रांत में 300 से अधिक लोगों की मौत की सूचना दी है, जिनमें कथित तौर पर सीरियाई बलों द्वारा मारे गए 27 द्रूज नागरिक भी शामिल हैं।
सीरिया को लेकर अमेरिका का है नर्म रुख
अमेरिका सीरिया की नई सरकार को अधिक समर्थन दे रहा है, ताकि देश पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने और उसे स्थिर करने में मदद मिल सके। ऐसे भी संकेत हैं कि अमेरिका और उसके सहयोगी सीरियाई सरकार को इस्राइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। अमेरिकी विशेष दूत टॉम बराक ने हालिया झड़पों को 'चिंताजनक' बताया है, तथा तनाव कम करने का आह्वान करते हुए सभी हितधारकों (ड्रूज, बेडौइन जनजाति, सीरियाई सरकार और इस्राइली सेना) के लिए शांतिपूर्ण, समावेशी परिणाम की आवश्यकता पर बल दिया है। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरौलिन लेविट ने भी शुक्रवार को (भारतीय समयानुसार) कहा कि ट्रंप सीरिया के शांतिपूर्ण देश बनने के मार्ग का समर्थन किया है। वे क्षेत्र में तनाव और संघर्ष को कम होते देखना चाहते हैं।
ड्रूज एक छोटा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसकी सीरिया में अनुमानित जनसंख्या करीब 7,00,000 (कुल सीरियाई जनसंख्या 2.3 करोड़ में से) है, जिनमें से अधिकांश दक्षिणी अस-स्वैदा प्रांत में रहते हैं, जो उनका पारंपरिक गढ़ है। असद शासन के पतन के बाद ड्रूज ने देश को संघीय बनाने की मांग की थी। वे एक विकेंद्रीकृत मॉडल की वकालत करते हैं, जो क्षेत्रीय समुदायों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगा। लेकिन गहरे राजनीतिक विभाजन, प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय एजेंडा और अल्पसंख्यक समूहों की अनसुलझी मांगों को देखते हुए दक्षिणी सीरिया में अशांति के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है।