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Morocco Protest: क्यों नौ दिन से सड़क पर हैं मोरक्को के युवा, विरोध प्रदर्शन के पीछे की क्या है वजह?

Mon, 06 Oct 2025 08:50 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 06 Oct 2025 08:50 AM IST
सार

मोरक्कों के युवा देश की सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ बीते नौ दिन से सड़क पर हैं। देश  भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। मोरक्को में हुआ क्या है? प्रदर्शन की वजह क्या है? सरकार का क्या रुख है? अब आगे क्या होगा? आइये जानते हैं...

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Why did the Gen-G protests start in Morocco after Nepal?
मोरक्को जन-जी प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल के बाद से अब मोरक्को में पिछले नौ दिन से युवाओं का प्रदर्शन जारी है। इस आंदोलन को 'जेन-जी 212' नाम दिया गया है। यह प्रदर्शन देश में बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण से किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बुनियादी सेवाओं की खराब स्थिति के बावजूद 2030 के विश्व कप की तैयारियों में भारी निवेश किया जा रहा है।

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ऐसे में यह जाना अहम हैं कि मोरक्को में क्या हुआ? प्रदर्शन की वजह क्या है? सरकार का क्या प्रतिक्रिया है? अब आगे क्या होगा? आइये जानते हैं…...

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मोरक्को में क्या हुआ?

मोरक्को में 27 सितंबर को युवाओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें अबतक कुल 3 लोगों की जान गई है। वहीं, लगभग 1000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध प्रदर्शन 'जेन-जी 212' नामक एक ऑनलाइन समूह द्वारा हो रहा है। इसके लिए टिकटॉक, इंस्टाग्राम और गेमिंग एप्लिकेशन डिस्कॉर्ड सहित सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग किया जा रहा है। बीते बुधवार को पहली मौत की सूचना मिली, जिसमें अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों ने अगाडिर के पास लकलिया में हथियार और गोला-बारूद चुराने की कोशिश कर रहे चाकुओं से लैस तीन युवकों को गोली मारकर मार डाला। यह घटना तब घटी जब 200 लोगों ने एक सुरक्षा बल स्टेशन पर हमला किया, जिसके कारण सुरक्षा बलों के सदस्यों घायल हो गए।  इसके बाद से पुलिस ने पहले आंसू गैस और चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। इस विरोध प्रदर्शनों ने राजधानी रबात, मुख्य व्यावसायिक शहर कैसाब्लांका, पर्यटन केंद्र माराकेच और बंदरगाह शहर टैंजियर को भी अपनी चपेट में ले लिया है। इस घटना को छोड़कर मोटे तौर पर ये प्रदर्शन अहिंसक रहे हैं। नौ दिन से जारी प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल चुके हैं। 

प्रदर्शन क्यों हो रहा है?

अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, “ ये प्रदर्शन तब शुरू हुए जब मोरक्को में सितंबर के मध्य में रबात में नए मौले अब्देल्लाह फुटबॉल स्टेडियम का अनावरण किया। इस स्टेडियम की लागत कथित तौर पर 7.5 करोड़ डॉलर है। इसी स्टेडियम में साल के अंत में दिसंबर में मोरक्को अफ्रीकी कप की मेजबानी करने वाला है। इसी दौरान, अगाडिर में चिकित्सा लापरवाही के कारण कई मरीजों की मौत की खबरों ने देश की विकास प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। युवाओं में एक तरफ स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की बदहाली को लेकर निराशा। वहीं, दूसरी ओर सरकार 2030 विश्व कप की मेजबानी के अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटी है। युवाओं में इसे लेकर आक्रोश है।  

 अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, “मोरक्कों के युवा सड़कों पर नारे और पोस्टरों के साथ उतर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार 2030 में फीफा विश्व कप के लिए अरबों डॉलर के निवेश कर रही है। वहीं, कई स्कूलों और अस्पतालों के पास अभी भी  बुनायादी सुविधाओं की कमी है। इनकी हालात दयनीय स्थिति में है। युवाओं का कहना है कि देश भर में नए स्टेडियमों का काम शुरू हो रहे हैं, पुराने स्टेडियमों में नवीकरण का काम किया जा रहा है, लेकिन देश में अभी अस्पाताल की कमी है। इसी बीच मोरक्कों के युवाओं का कहना है कि वह इस प्रदर्शन से देश में गहरी आर्थिक असमानताओं की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

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इन प्रदर्शनों का चेहरा कौन है?
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, जेन-जी 212 आंदोलन केवल दो सप्ताह पहले ही सामने आया है, लेकिन इसने तेजी से लोकप्रियता हासिल कर ली है। इसके साथ ही यह प्रदर्शन बिना किसी नेता या राजनीतिक दलों या यूनियनों के औपचारिक संबंधों से किए जा रहे हैं। इसके साथ ही इसके समर्थक टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफार्म से बढ़ रहे हैं।  मोरक्को इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी एनालिसिस के निदेशक मोहम्मद मस्बाह ने कहा, "यह एक विकेन्द्रीकृत, नेतृत्वविहीन और अस्थिर संगठन है, या यह कहें कि यह एक नेटवर्क है। उनका कोई नेता नहीं है और वह किसी राजनीतिक दल या संघ से संबंध नहीं रखते हैं। इससे अधिकारियों के लिए उनसे बातचीत करना या उन्हें अपने साथ मिलाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि वह नहीं जानते कि वह कौन हैं।"

इन प्रदर्शनों पर सरकार का क्या रुख है? 
मोरक्को की सरकार ने कहा कि वह युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने वाली शिकायतों का समाधान करेगी। यह कदम सुरक्षा बलों द्वारा अशांति के दौरान तीन लोगों की हत्या के एक दिन बाद उठाया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मोरक्को के प्रधानमंत्री अजीज अखन्नौच ने कहा कि वह युवाओं के विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं। अखन्नौच ने  कहा कि उनकी सरकार "युवा आंदोलनों के दौरान कही जानी वाली मांगों पर विचार किया है। हम इस पर बातचीत और चर्चा के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही अधिकारियों ने लूटपाट या तोड़फोड़ में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। इसके साथ ही अधिकारियों ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर विश्व कप खर्च को प्राथमिकता देने से इनकार किया है। उन्होंने कहा  कि स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याएं पिछली सरकारों से विरासत में मिली हैं। सरकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी औली अलामी ने सरकारी समाचार एजेंसी एमएपी को बताया कि दंगाइयों को 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

मोरक्को में क्या है हालात?

मोरक्को की राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी के अनुसार, मोरक्को की बेरोजगारी दर 12.8% है, जिसमें युवा बेरोजगारी 35.8% और स्नातकों में 19% है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मोरक्को में प्रति 10,000 लोगों पर आठ से भी कम डॉक्टर हैं, जो तय मानक 25 से काफी कम है।

अब आगे क्या? 

अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार,” मोरक्को में सितंबर 2026 में  चुनाव होने वाले हैं। अब जेन जी के इस प्रदर्शन के बाद से मोरक्को की राजनीति में बदलाव हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इस आंदोलन की वजह से  सरकार को 2030 फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़े दिखावटी और बुनियादी ढांचा-केंद्रित कार्यक्रमों से आगे बढ़कर आम जनता की जरूरतों और सामाजिक प्राथमिकताओं पर ध्यान देने के लिए मजबूर करेगा। वहीं, मोरक्को के संकट प्रबंधन के रिकॉर्ड के अनुसार मोरक्को में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे। यहां नेपाल की तरह यह आंदोलन किसी बड़े क्रांतिकारी रूप में बदलने की संभावना कम है, लेकिन इसे देश के लिए एक निर्णायक क्षण और सत्ता प्रतिष्ठान के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही इस आंदोलन ने साफ कर दिया है कि डिजिटली रूप से जुड़े और राजनीतिक रूप से जागरूक युवाओं और वर्तमान शासक वर्ग के बीच गहरी खाई मौजूद है।

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