डब्ल्यूएचओ ने कहा: ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका की वैक्सीन को रोकने का कोई कारण नहीं
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कुछ यूरोपीय देशों ने रक्त में थक्का जमने की आशंकाओं के चलते ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा बनाई गई कोविड-19 वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को कहा कि इस वैक्सीन पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है। डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता मार्गरेट हैरिस ने कहा, 'हां, हमें एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का इस्तेमाल जारी रखना चाहिए। ऐसा कोई कारण नहीं है कि इसका उपयोग न किया जाए।'
बता दें कि कुछ देशों ने गुरुवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल को इस भय से रोक दिया था कि इससे रक्त में थक्का जम सकता है। बता दें कि इस वैक्सीन का निर्माण भारत के सीरम संस्थान ने किया है। कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप को एक साल पूरा हो गया है और सामने आई वैक्सीन से अब जल्द ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, इस दौरान सामने आए वायरस के नए स्ट्रेन ने वैज्ञानिक समुदाय की चिंता जरूर बढ़ाई है।
वर्ल्डओमीटर के अनुसार कि दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक कुल 11 करोड़ 92 लाख 93 हजार 681 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, इस जानलेवा महामारी की वजह से अब तक कुल 26 लाख 44 हजार 627 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा नौ करोड़, 48 लाख, 80 हजार 764 लोग इस बीमारी से ठीक हुए हैं। उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में अभी भी कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के करीब दो करोड़ 17 लाख 67 हजार 290 मामले हैं।
जर्मनी में जारी रहेगा एस्ट्राजेनेका के टीका का इस्तेमाल
एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 टीके लेने के बाद खून का थक्का बनने संबंधी खबरों के बाद यूरोप के कई देशों ने टीके का इस्तेमाल कुछ समय तक रोकने की शुक्रवार को घोषणा की जबकि जर्मनी में टीकाकरण जारी रहेगा। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पाह ने कहा कि टीका के संभावित गंभीर दुष्प्रभाव की खबरों को देश ने गंभीरता से लिया है लेकिन देश के टीका नियामक और यूरोपीय मेडिसीन एजेंसी का कहना है कि टीका लेने से खतरनाक खून का थक्का बनने की आशंका बढ़ने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।
स्पाह ने बर्लिन में कहा, 'मुझे अफसोस है कि समझ की कमी के कारण शुक्रवार को यूरोपीय संघ के कुछ देशों ने एस्ट्राजेनेका के टीके पर रोक लगा दी।' कुछ लोगों में खून का थक्का बनने के बारे में खबरें आने के बाद सबसे पहले डेनमार्क ने एस्ट्राजेनेका के टीके पर अस्थाई रोक लगा दी। इसके बाद नार्वे, आइसलैंड और बुल्गारिया ने भी ऐसे ही कदम उठाए। बुल्गारिया के प्रधानमंत्री बोयको बोरिसोव ने कहा, 'जब तक सारे संदेह दूर न हो जाएं और विशेषज्ञ गारंटी न दें कि लोगों को कोई खतरा नहीं है हम टीकाकरण रोक रहे हैं।'
उन्होंने कहा कि यूरोपीय मेडिसीन एजेंसी द्वारा टीका को सुरक्षित बताए जाने पर ही देश में टीकाकरण शुरू किया जाएगा। थाइलैंड ने भी जांच पूरी होने तक टीके के इस्तेमाल पर रोक लगायी है जबकि रोमानिया और इटली ने खास बैच के टीके की खेप के इस्तेमाल को रोकने का फैसला किया है। ऑस्ट्रिया ने भी टीके की खेप के एक बैच से टीकाकरण को रोकने का निर्णय किया। बहरहाल, फ्रांस, पोलैंड और नाइजीरिया ने कहा है कि वे टीके का इस्तेमाल जारी रखेंगे और राष्ट्रीय नियामक भी इस संबंध में जांच करेंगे।
ब्रिटेन के औषधि नियामक ने भी कहा है कि एस्ट्राजेनेका के टीके के कारण लोगों में खून का थक्का बनने संबंधी कोई सूचना नहीं मिली है। ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका टीके की 1.1 करोड़ से ज्यादा खुराकें लोगों को दी गई हैं।
30 जनवरी 2020 को दी थी कोविड की पहली चेतावनी
कोविड-19 को लेकर डब्ल्यूएचओ ने सबसे पहले चेतावनी 30 जनवरी 2020 को दी थी और इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया था। इसके छह हफ्ते बाद 11 मार्च को डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने कोविड-19 को ‘महामारी’ घोषित किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वायरस अंटार्कटिका को छोड़ दुनिया के सभी महाद्वीपों में पहुंच चुका था। संगठन ने इस दौरान कई गलत कदम भी उठाए और महीनों तक लोगों को मास्क लगाने के खिलाफ सलाह दी तथा यह भी कहा कि कोविड-19 हवा से नहीं फैलता है।