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टीबी संक्रमण में कमी, मगर बीमारी का विकराल रूप बरकरार

Tue, 22 Oct 2019 01:18 AM IST
देव कश्यप यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: देव कश्यप Updated Tue, 22 Oct 2019 01:18 AM IST
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WHO Report shows reduction in number of TB deaths horrible form disease remains intact
टीबी से पीड़ित एक महिला का घर पर इलाज किया जा रहा है - फोटो : UNDP

संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वर्ष 2018 में तपेदिक (टीबी) बीमारी के कारण 15 लाख लोगों की मौत हुई जो दर्शाता है कि इस बीमारी से निपटना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यूएन एजेंसी ने अपनी नई रिपोर्ट में इस बीमारी के उन्मूलन के लिए ज्यादा संसाधन निवेश किए जाने और राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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‘Mycobacterium tuberculosis’ नामक बैक्टीरिया की वजह से टीबी संक्रमण होता है जिसके लक्षण लगातार खांसी, थकान और वजन गिरने के रूप में सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ‘ग्लोबल टीबी रिपोर्ट’ बताती है कि वर्ष 2018 में टीबी संक्रमण के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए और 30 लाख से ज्यादा ऐसे पीड़ित हैं जिनकी आवश्यकतानुसार देखरेख नहीं हो रही है।
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इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में चीन, भारत, इंडोनेशिया, नाईजीरिया, पाकिस्तान, फिलिपींस और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि टीबी बीमारी के भारी बोझ से पीड़ित ब्राजील, चीन, रूस और जिम्बाब्वे में वर्ष 2018 तक उपचार का स्तर 80 फीसदी तक पहुंच गया है।
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वर्ष 2018 में टीबी का प्रकोप 2017 में तुलना में थोड़ा कम था, लेकिन गरीब और वंचित जनसमूहों में टीबी संक्रमण अब भी बहुत अधिक है, विशेषकर एचआईवी से पीड़ित लोगों में। इस स्थिति के पीछे मुख्य वजह टीबी के इलाज का खर्च बताया गया है। आंकड़े दर्शाते हैं कि टीबी से बुरी तरह प्रभावित देशों में 80 फीसदी से ज्यादा मरीज अपनी कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा उपचार पर खर्च करते हैं।

इलाज में दवाई का असर ना कर पाना एक नई चुनौती है और वर्ष 2019 में टीबी के पांच लाख से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए जिनमें इलाज के दौरान दवाई ने काम नहीं किया।

मजबूत प्रणाली और बेहतर देखरेख

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक टीबी के अंत के लिए प्रगति को तेज करना होगा। इसके लिए मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और सेवाओं को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में नए सिरे से निवेश करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए संकल्प लेना होगा।

सितंबर 2019 में न्यूयॉर्क में बैठक के दौरान राष्ट्राध्यक्षों ने सभी के लिए स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने और संचारी रोगों जैसे टीबी, एचआईवी और मलेरिया से निपटने का संकल्प लिया था। इन प्रयासों के मद्देनजर यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मुहिम की पुकार लगाई है ताकि कई बीमारियों का निदान और इलाज एक साथ किया जा सके।

उदाहरण के तौर पर एकीकृत ढंग से एचआईवी और टीबी के उपचार कार्यक्रम चलाने से टीबी से पीड़ित दो-तिहाई मरीजों को अब अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में जानकारी है, जिसके लिए अब वह अपना इलाज करा रहे हैं। वर्ष 2018 में टीबी से पीड़ित 70 लाख लोगों का इलाज किया गया जबकि 2017 में यह संख्या 64 लाख थी।

स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक का कहना है कि ये परिणाम दर्शाते हैं कि अगर सभी देश मिलकर प्रयास करेंगे तो वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने की मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। ‘Find.Treat.All.EndTB’, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, स्टॉप टीबी पार्टनरशिप, और ग्लोबल फंड टू फाइट एड्स, टीबी एंड मलेरिया की संयुक्त पहल है जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 टीबी का अंत करना है।  टीबी पर रिसर्च के लिए एक अरब 20 करोड़ डॉलर जबकि उसकी रोकथाम और देखरेख के लिए तीन अरब 30 करोड़ डॉलर की धनराशि का अभाव आंका गया है।

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