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Monkeyox: WHO ने मंकीपॉक्स को घोषित किया वैश्विक आपातकाल, 70 से ज्यादा देशों में फैल चुका वायरस
Sat, 23 Jul 2022 09:05 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 23 Jul 2022 09:05 PM IST
सार
डब्ल्यूएचओ के महानिदेश डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) का प्रतिनिधित्व करता है।
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टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
दुनिया के कई देशों में पैर पसार चुके मंकीपॉक्स की बीमारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) घोषित किया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने कहा वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, "एक महीने पहले मैंने यह आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत आपातकालीन समिति बुलाई थी कि क्या बहु-देशीय मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। उस बैठक में अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए थे। समिति ने सर्वसम्मति से माना कि प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उस समय 47 देशों से मंकीपॉक्स के 3040 मामले सामने आए थे। तब से इसका प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और अब 75 देशों और क्षेत्रों से 16 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं और पांच मौतें हुई हैं।"
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टेड्रोस ने जारी एक बयान में कहा, "विकसित हो रहे प्रकोप के आलोक में, मैंने इस सप्ताह के गुरुवार को ताजा आंकड़ों की समीक्षा करने और सलाह देने के लिए समिति का पुनर्गठन किया। सबूतों और मुद्दों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के लिए मैं समिति को धन्यवाद देता हूं। इस मौके पर समिति इस बात पर आम सहमति तक पहुंचने में असमर्थ थी कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। आज हम जो रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं उसमें समिति के सदस्यों ने इसके पक्ष और विपक्ष में कारण बताए हैं।"
"अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत, मुझे यह तय करने में पांच तत्वों पर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। पहला, देशों द्वारा प्रदान की गई जानकारी- जो इस मामले में दिखाती है कि यह वायरस कई देशों में तेजी से फैल गया है, जिन्होंने इसे पहले नहीं देखा है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के लिए तीन मानदंड। तीसरा, आपातकालीन समिति की सलाह। चौथा, वैज्ञानिक सिद्धांत, साक्ष्य और अन्य प्रासंगिक जानकारी और पांचवां, मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम, अंतरराष्ट्रीय प्रचार और अंतरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप की संभावना।"
टड्रोस ने आगे कहा, "डब्ल्यूएचओ का आकलन है कि यूरोपीय क्षेत्र को छोड़कर, मंकीपॉक्स का विश्व स्तर पर सभी क्षेत्रों में मध्यम जोखिम है। यह आगे अंतरराष्ट्रीय प्रसार का एक स्पष्ट जोखिम भी है, हालांकि अतंरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप का जोखिम फिलहाल कम है। तो संक्षेप में हमारे पास एक प्रकोप है जो संचरण के नए तरीकों से दुनियाभर में तेजी से फैल गया है, जिसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं और जो अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों में मानदंडों को पूरा करता है। इन सभी कारणों से मैंने तय किया है कि वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।"
भारत में अब तक तीन मामले
भारत में अब तक मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया था। जुलाई की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे एक 35 वर्षीय युवक में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया था कि मलप्पुरम का रहने वाला युवक छह जुलाई को अपने गृह राज्य लौटा था और उसे 13 जुलाई से बुखार है। युवक का इलाज तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इससे पहले भारत में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला केरल के कन्नूर जिले में दर्ज किया गया था। 13 जुलाई को दुबई से कन्नूर लौटे शख्स में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसका इलाज तिरुवनंतपुरम के परियारम मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। वहीं, पहला मरीज भी केरल में ही मिला था। 12 जुलाई को यूएई से कोल्लम पहुंचे व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखे थे।
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"For all of these reasons, I have decided that the global #monkeypox outbreak represents a public health emergency of international concern," says WHO DG Dr Tedros Adhanom pic.twitter.com/USzn5CIQE2
— ANI (@ANI) July 23, 2022विज्ञापन
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, "एक महीने पहले मैंने यह आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत आपातकालीन समिति बुलाई थी कि क्या बहु-देशीय मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। उस बैठक में अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए थे। समिति ने सर्वसम्मति से माना कि प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उस समय 47 देशों से मंकीपॉक्स के 3040 मामले सामने आए थे। तब से इसका प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और अब 75 देशों और क्षेत्रों से 16 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं और पांच मौतें हुई हैं।"
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टेड्रोस ने जारी एक बयान में कहा, "विकसित हो रहे प्रकोप के आलोक में, मैंने इस सप्ताह के गुरुवार को ताजा आंकड़ों की समीक्षा करने और सलाह देने के लिए समिति का पुनर्गठन किया। सबूतों और मुद्दों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के लिए मैं समिति को धन्यवाद देता हूं। इस मौके पर समिति इस बात पर आम सहमति तक पहुंचने में असमर्थ थी कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। आज हम जो रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं उसमें समिति के सदस्यों ने इसके पक्ष और विपक्ष में कारण बताए हैं।"
"अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत, मुझे यह तय करने में पांच तत्वों पर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। पहला, देशों द्वारा प्रदान की गई जानकारी- जो इस मामले में दिखाती है कि यह वायरस कई देशों में तेजी से फैल गया है, जिन्होंने इसे पहले नहीं देखा है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के लिए तीन मानदंड। तीसरा, आपातकालीन समिति की सलाह। चौथा, वैज्ञानिक सिद्धांत, साक्ष्य और अन्य प्रासंगिक जानकारी और पांचवां, मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम, अंतरराष्ट्रीय प्रचार और अंतरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप की संभावना।"
टड्रोस ने आगे कहा, "डब्ल्यूएचओ का आकलन है कि यूरोपीय क्षेत्र को छोड़कर, मंकीपॉक्स का विश्व स्तर पर सभी क्षेत्रों में मध्यम जोखिम है। यह आगे अंतरराष्ट्रीय प्रसार का एक स्पष्ट जोखिम भी है, हालांकि अतंरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप का जोखिम फिलहाल कम है। तो संक्षेप में हमारे पास एक प्रकोप है जो संचरण के नए तरीकों से दुनियाभर में तेजी से फैल गया है, जिसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं और जो अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों में मानदंडों को पूरा करता है। इन सभी कारणों से मैंने तय किया है कि वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।"
भारत में अब तक तीन मामले
भारत में अब तक मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया था। जुलाई की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे एक 35 वर्षीय युवक में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया था कि मलप्पुरम का रहने वाला युवक छह जुलाई को अपने गृह राज्य लौटा था और उसे 13 जुलाई से बुखार है। युवक का इलाज तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इससे पहले भारत में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला केरल के कन्नूर जिले में दर्ज किया गया था। 13 जुलाई को दुबई से कन्नूर लौटे शख्स में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसका इलाज तिरुवनंतपुरम के परियारम मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। वहीं, पहला मरीज भी केरल में ही मिला था। 12 जुलाई को यूएई से कोल्लम पहुंचे व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखे थे।