फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Uyghurs Muslims of China, on which America gave strict advice to Pakistan

कौन हैं चीन के उइगुर मुसलमान, जिसपर अमेरिका ने पाकिस्तान को दी कड़ी नसीहत

Sat, 28 Sep 2019 10:59 AM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 28 Sep 2019 10:59 AM IST
विज्ञापन
Uyghurs Muslims of China, on which America gave strict advice to Pakistan
उइगुर मुस्लिम

कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की झूठी अफवाह फैला रहे पाकिस्तान को अमेरिका से कड़ी नसीहत मिली है। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वह चीन में अवैध रूप से हिरासत में रह रहे मुसलमानों की चिंता पहले करे।


loader

कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की झूठी अफवाह फैला रहे पाकिस्तान को अमेरिका से कड़ी नसीहत मिली है। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वह चीन में अवैध रूप से हिरासत में रह रहे मुसलमानों की चिंता पहले करे।

गौरतलब है कि चीन में उइगुरों के लिए डिटेंशन कैंप का निर्माण किया गया है। जहां उइगुरों को कैद करके रखा जाता है। उन्हें किसी भी तरीके की धार्मिक चीजों का पालन करने की अनुमति नहीं है। उइगुरों को दाढ़ी रखने और धार्मिक अनुष्ठान करने तक पर पाबंदी है। 

अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र को जानकारी मिली कि लगभग 10 लाख उइगुर मुस्लिमों को चीन के पश्चिमी शिंजियांग क्षेत्र में बनाए गए डिटेंशन कैंपों में रखा गया है। जहां उन्हें समाज के प्रति नजरिया बदलने के लिए शिक्षा दी जा रही है। 

मानवाधिकार समूहों ने इस बात की जानकारी दी, वहीं, इन आरोपों को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया। इस दौरान इस बात की भी जानकारी दी गई थी कि शिंजियांग में रहने वाले लोगों पर चीन द्वारा कड़ी नजर रखी जाती है। 

शिंजियांग प्रांत में मीडिया पर पाबंदी हैं

चीन के शिंजियांग प्रांत में मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। यहां किसी भी मीडिया संस्थान के आने की मनाही है। लेकिन बीबीसी ने बताया कि वह उस प्रांत में गया और उसने वहां के हालात बयान किए। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वहां बड़े तौर डिटेंशन कैंपों का निर्माण किया जा रहा है और प्रांत में बड़ी मात्रा में पुलिस की मौजूदगी रहती है। यहां तक कि लोगों पर संदेह होने पर अधिकारियों द्वारा उनके फोन तक की जांच की जाती है। 

बीबीसी के हवाले से एक उइगर व्यक्ति ने बताया कि उसे 2015 में डिटेंशन कैंप से रिहा किया गया। उसने बताया कि उसे कैंप के अंदर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को सुबह होने से पहले जगा दिया जाता था और उन्हें कानून सीखने के लिए मजबूर किया था और गाना गाने के लिए मजबूर किया जाता था, जिसका शीर्षक होता था 'बिना कम्युनिस्ट पार्टी के कोई नया चीन नहीं हो सकता है।'

बीबीसी को दिए साक्षात्कार में एक और उइगर कैदी ओमीर ने बताया कि उसे कैंप के भीतर सोने नहीं दिया जाता था। उसे घंटों तक लटकाया जाता था फिर उसे पीटा जाता था। 

उसने बताया कि उनके पास मोटी लकड़ी और रबर के बल्ले, मुड़े तार से बनी चाबुक, त्वचा को छेदने के लिए सुई, नाखूनों को बाहर निकालने के लिए पलायर्स थे। ये सभी उपकरण उसके सामने टेबल पर प्रदर्शित किए गए थे, जो किसी भी समय उपयोग करने के लिए तैयार थे। उसने बताया कि वह अन्य लोगों को भी चिल्लाते हुए सुनता था। 

कौन हैं उइगुर लोग?

इस्लाम को मानने वाले उइगुर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं। उइगुर पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है। 

इनमें से लगभग 70 प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं। उइगुर लोग उइगुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा से आने वाली एक बोली है।  उइगुर एक अल्पसंख्यक तुर्क जातीय समूह है जो मध्य और पूर्वी एशिया के सामान्य क्षेत्र से सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुए हैं। चीन में  उइगुरों की आबादी एक करोड़ से अधिक है। 

उइगुरों को केवल एक क्षेत्र के मूल निवासियों के रूप में मान्यता दी जाती है, जोकि चीन का शिंजियांग क्षेत्र है। उन्हें चीन के 55 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यकों में से एक माना जाता है। उइगुरों को चीन द्वारा केवल एक बहुसांस्कृतिक राष्ट्र के भीतर एक क्षेत्रीय अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता प्राप्त है और चीन उनके स्वदेशी समूह होने के विचार को खारिज करता रहा है।

उइगुरों ने पारंपरिक रूप से तकलीम रेगिस्तान में बिखरे हुए नखलिस्तान में निवास किया है, जिसमें तारिम बेसिन शामिल है, एक ऐसा क्षेत्र जिसपर ऐतिहासिक रूप से चीन, मंगोलों, तिब्बतियों और तुर्किक दुनिया सहित कई सभ्यताओं द्वारा शासन किया गया। 

उइगुर 10वीं शताब्दी में इस्लाम के करीब आना शुरू हुए और 16वीं शताब्दी तक बड़े पैमाने पर मुस्लिम बन गए, और जिसके बाद से ही इस्लाम ने  उइगुर संस्कृति और पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'विश्व उइगुर कांग्रेस' का अनुमान है कि चीन के बाहर  उइगुरों की आबादी लगभग 10 लाख से 15 लाख के बीच है।  उइगुरों के महत्वपूर्ण प्रवासी समुदाय मध्य एशियाई देशों कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान और तुर्की में मौजूद हैं। वहीं, उइगुरों के कनाडा, जर्मनी, बेल्जियम, नॉर्वे, स्वीडन, रूस, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में छोटे समुदाय रहते हैं।

चीन सरकार के साथ उइगुरों के तनाव की वजह क्या है?

शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगुर मुस्लिम 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' चलाते रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होना है। दरअसल, 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान, जो अब शिनजियांग है, को एक अलग राष्ट्र के तौर पर कुछ समय के लिए पहचान मिली थी, लेकिन उसी साल यह चीन का हिस्सा बन गया। 

जिसके बाद 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र की आजादी के लिए यहां के लोगों ने काफी संघर्ष किया। उस समय इन लोगों के आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों का समर्थन भी मिला लेकिन, चीनी सरकार के कड़े रुख के आगे किसी की एक न चली।

बीते कुछ समय के दौरान इस क्षेत्र में हान चीनियों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। उइगुरों का कहना है कि चीन की वामपंथी सरकार हान चीनियों को शिंजियांग में इसीलिए भेज रही है कि उइगुरों के आंदोलन 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' को दबाया जा सके। चीनी सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियां भी कुछ ऐसा ही दर्शाती हैं। 

शिंजियांग प्रांत में रहने वाले हान चीनियों को मजबूत करने के लिए चीन सरकार हर संभव मदद दे रही है यहां तक कि इस क्षेत्र की नौकरियों में उन्हें ऊंचे पदों पर बिठाया जाता है और उइगुरों को दोयम दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं। 

कुछ जानकार चीनियों को नौकरियों में ऊंचे पदों पर बिठाने का एक कारण यह भी मानते हैं कि सामरिक दृष्टि से शिंजियांग प्रांत चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे में चीनी सरकार ऊंचे पदों पर विद्रोही रुख वाले उईगुरों को बिठाकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed